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Himachal Governor: राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर बोले- मंदिरों की आय से मजबूत हो बाल कल्याण परिषद

Thu, 19 May 2022 07:48 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

राज्य बाल कल्याण परिषद को एक विभाग की तरह संचालित नहीं किया जाना चाहिए। सुझाव दिया कि मंदिर न्यास, परोपकारी संस्थाओं सहित समाज के समृद्ध वर्गों को आगे बढ़कर चैरिटेबल गतिविधियों के माध्यम से इस संस्थान के फंड और संसाधनों को बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी आश्रमों का नियमित तौर पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राज्य बाल कल्याण परिषद की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने परिषद की आय के स्रोत बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। परिषद को अपनी गतिविधियों में आजीवन सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि जमीनी स्तर पर संसाधन जुटाने के लिए जिला उपायुक्त सहयोग कर सकते हैं। मंदिरों की आय और निगमित सामाजिक दायित्व फंड से भी यह सुनिश्चित किया जा सकता है। राज्य बाल कल्याण परिषद को एक विभाग की तरह संचालित नहीं किया जाना चाहिए। सुझाव दिया कि मंदिर न्यास, परोपकारी संस्थाओं सहित समाज के समृद्ध वर्गों को आगे बढ़कर चैरिटेबल गतिविधियों के माध्यम से इस संस्थान के फंड और संसाधनों को बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी आश्रमों का नियमित तौर पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। कहा कि परिषद के सभी सदस्यों को स्वयंसेवकों के रूप में कार्य करना चाहिए। परिषद की बैठकें नियमित करने के भी निर्देश दिए। 

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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने परिषद के बेहतर संचालन के लिए निगमित सामाजिक दायित्व के अंतर्गत निजी क्षेत्र को सक्रिय सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि परिषद के आजीवन सदस्यों के सदस्यता शुल्क को पांच हजार से बढ़ाकर 11 हजार किया जाना चाहिए। कहा कि हिमाचल देवभूमि होने से प्रदेशवासियों में मानवीय सोच की अधिकता के कारण राज्य में परिजनों की ओर से अभिभावकों एवं वृद्ध जनों के परित्याग के मामले कम सामने आते हैं। समाज के इस वर्ग के कल्याण के लिए विभिन्न परियोजनाएं शुरू करने के लिए औद्योगिक घरानों को भी प्रेरित किया जाना चाहिए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग निराश्रित बच्चों, विशेष रूप से सक्षम और बुजुर्गों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है। बाल विकास परिषद की महासचिव पायल बहल वैद्य ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। 

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संस्कार की भाषा है संस्कृत : आर्लेकर

हिमाचल प्रदेश राजभवन में संस्कृत भारती के माध्यम से 20 दिवसीय संभाषण शिविर का वीरवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने समापन किया। मुख्य वक्ता के तौर पर संस्कृत भारती के अखिल भारत संघटन मंत्री दिनेश कामत भी मौजूद रहे। राजभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संस्कृत भाषा में कार्यक्रम का संचालन किया। पूरे देश में राजभवन स्तर पर आयोजित संस्कृत पर आधारित यह पहला संभाषण शिविर था। राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत भाषा संस्कार की भाषा है। योग्य संस्कार न मिलने से समाज में हमारे सामने अनेक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। दुनिया के अधिकांश विकसित राष्ट्रों में अपनी भाषा में ही हर कार्य किया जाता है। आज देश में स्थितियां बदल रही हैं और हमारे समक्ष संस्कृत को दोबारा स्थापित करने का सुअवसर है।

कहा कि भाषा सीखने के लिए पुस्तक की नहीं बल्कि संभाषण की आवश्यकता होती है। संभाषण एक कला है जो सुनकर प्रभावी होती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त कि राजभवन में इसका सफलतापूर्वक कार्यान्वयन किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे। विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे संभाषण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इससे पूर्व दिनेश कामत ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कृत की अधिक उपयोगिता पर बल दिया। इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़कर इसे अपनाने पर बल दिया। राज्यपाल के सचिव विवेक भाटिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। राजभवन कर्मचारियों ने संस्कृत में संगीत कार्यक्रम और अपने अनुभव भी सांझे किए। संस्कृत भारत उत्तर क्षेत्र संघटन मंत्री नरेंद्र कुमार, दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र शर्मा भी इस दौरान मौजूद रहे।
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