राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए फायदेमंद है। वह महाराष्ट्र के नवनाथ नगर में शनिवार को ‘बीज स्वावलंबन के लिए गठबंधन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे।
इसमें हिमाचल के राज्यपाल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। यह कार्यक्रम महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, अक्षय खेती संस्थान और डॉं. हेडगेवार सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
राज्यपाल ने कहा कि किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ कर ही देश को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रसायनिक खेती से किसानों की आर्थिकी मजबूत नहीं की जा सकती।
मौजूदा समय में रसायनिक खेती ने किसानों की जमीन बंजर बना दी है, उत्पादन घट रहा है और किसान लोन के बोझ तले आत्महत्या करने को मजबूर है। राज्यपाल ने कहा कि पद्मश्री सुभाष पालेकर की ओर से किसानों को प्राकृतिक कृषि के तौर पर विकल्प दिया गया है।
10 साल से वह स्वयं भी इस पद्धति को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के कृषि फार्म में अपना रहे हैं। विभिन्न विश्वविद्यालय में जांच के बाद अब ये सिद्ध हो चुका है कि प्राकृतिक कृषि से ही किसानों की आय दोगुनी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक हिमाचल को देश का कृषि राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पूर्व महात्मा फुले विद्यापीठ के कुलपति डॉ. केपी विश्वनाथ ने राज्यपाल का स्वागत किया।