अनावश्यक हॉर्न से स्वास्थ्य के लिए होने वाले नुकसान के संबंध में सरकार जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से प्रदेश में नो हॉर्न प्लीज अभियान शुरू करेगी। यह निर्णय अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया।
नंदा ने कहा कि अनावश्यक हॉर्न बजाने से न केवल लोगों को असुविधा होती है, बल्कि यह भी प्रदर्शित होता है कि हम पर्यावरण तथा अन्य प्राणियों के प्रति कितने संवेदनशील हैं। शोर महज एक बाधा नहीं, बल्कि एक गंभीर पर्यावरण संबंधी समस्या तथा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
उन्होंने कहा कि हॉर्न बजाने से ध्वनि प्रदूषण के बारे में जागरूकता की कमी से मनुष्य के स्वास्थ्य और व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव चिंता का विषय है। इसका शीघ्र समाधान करने की आवश्यकता है। कहा कि अभियान इलेक्ट्रॉनिक तथा सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सभी हितधारकों की सहमति से चलाया जाएगा।
चुनिंदा स्थानों पर पुलिस कर्मियों को ध्वनि मीटर दिए जाएंगे। सीटी बजाने के बजाय रुको और जाओ का प्रयोग करने को भी कहा जाएगा। अभियान में विभिन्न विभागों का सहयोग लिया जाएगा। कहा कि पहले चरण में शिमला तथा मंडी शहरों से अभियान शुरू किया जाएगा। चरणबद्ध ढंग से राज्य के अन्य शहरी क्षेत्रों में भी चलाया जाएगा।
अभियान शुरू होने के पहले यातायात पुलिस लोगों को सतर्क करेगी। इसके बाद अत्यधिक एवं अनावश्यक हॉर्न बजाने पर चालान करेगी।
बैठक में शिमला के उपायुक्त अमित कश्यप, विशेष सचिव मुख्यमंत्री तथा विज्ञान, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी डीसी राणा, सूचना एवं जन संपर्क विभाग के निदेशक अनुपम कश्यप, नगर निगम शिमला के आयुक्त रोहित जमवाल के अलावा, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अधिकारी उपस्थित थे।