राज्य सचिवालय शिमला में सोमवार को प्रेस वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए यह कदम जरूरी है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, फार्मेसी और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों की भी हर साल ड्रग स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। सरकार इसके लिए संस्थानों के माध्यम से नियमित ड्रग स्क्रीनिंग तंत्र विकसित करेगी। मेडिकल टेस्ट पास नहीं करने वालों को कोई सजा नहीं दी जाएगी, उनका इलाज किया जाएगा। सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल पुलिस अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहती है। जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में भी एंटी ड्रग्स परफार्मेंस को शामिल किया जाएगा। संबंधित जिले में चिट्टा तस्करी रोकने, जागरूकता बढ़ाने और नेटवर्क तोड़ने में अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चिट्टा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया गया है। जिन पंचायतों में नशे के मामले अधिक पाए गए हैं, वहां लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। पंचायत चुनावों के बाद इन क्षेत्रों में दोबारा जनजागरूकता अभियान शुरू होगा। नशा तस्करों के खिलाफ आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सूचना देने वालों की इनामी राशि 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई है।