पर्यटकों की चहलकदमी से गुलजार रहने वाला मनाली का माल रोड सुनसान है। पर्यटन स्थल वीरान पड़े हैं। ब्यास नदी में आई प्रलयकारी बाढ़ ने मनाली का जीवन पटरी से उतार दिया है। एक सप्ताह से बाढ़ प्रभावितों के आंसू नही थम रहे। पहाड़ बाढ़ की पीड़ा से कराह रहे हैं। बाढ़ के कारण फंसे पर्यटक मनाली से लौट गए हैं। लेकिन, जनजीवन पटरी पर नहीं लौटा। चार दिन देश-दुनिया से मनाली कटी रही। अब मोबाइल नेटवर्क शुरू हो गए हैं, लेकिन बिजली और पेयजल आपूर्ति अभी भी प्रभावित चल रही है।
दोपहर के समय बिजली गुल हो रही है। मुख्य सड़क बंद होने से राइट बैंक के सैकड़ों गांवों के लोग अलग-थलग पड़ गए हैं। वामतट मार्ग से सिर्फ छोटे वाहन ही जा पा रहे हैं । यहां लोग जाम से बेहाल हो रहे हैं। पेट्रोल और डीजल की कमी खल रही है। पंपों में डीजल एक हजार और पेट्रोल 500 रुपये से अधिक नहीं मिल रहा। सप्लाई घटने के कारण सब्जियां महंगी हो गई हैं। मनाली में टमाटर 180 से 200, गोभी 60 और मटर के दाम 80 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं।
गैस की आपूर्ति भी घट गई है। ग्रामीण इलाकों की सप्लाई लगभग बंद है। बाढ़ प्रभावित बाहंग तक गैस नहीं पहुंची। एसडीएम मनाली रमन कुमार शर्मा ने बताया कि जनजीवन पटरी पर लाने के प्रयास जारी हैं। जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति कुल्लू से छोटी गाड़ियों से करवाने के आदेश दिए गए हैं। गांवों में रसोई गैस की सप्लाई ठप बुरुआ के लाल चंद ने बताया बाढ़ से जनजीवन ठप है।
गांवों तक रसोई गैस की सप्लाई नहीं पहुंच रही। किराये के कमरे लेकर रह रहे मजदूरों के पास केरोसिन नही है। उन्हें खाना बनाना मुश्किल हो गया है। माेमबत्ती तक नहीं मिल रही। बाहंग की गीता ने बताया कि उनके इलाके में गैस नहीं आ रही और सड़क अभी भी बंद है। सुरेश ने बताया कि बिजली चालू हो गई है लेकिन बार-बार कट लग रहे हैं।