हालांकि हिमाचल सरकार ने यह कहते हुए बात को खारिज कर दिया था कि प्रदेश में सीपीएस की नियुक्ति 2007 में बने हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्ति, सुविधा एवं एमेनेटीज) एक्ट के तहत करती है। इसी बात को आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने भी आरटीआई कार्यकर्ता के पक्ष में कोई आदेश नहीं दिए।
पिछली वीरभद्र सरकार ने भी इसी एक्ट के तहत ही 9 सीपीएस की नियुक्ति की थी। प्रदेश की नई जयराम ठाकुर सरकार में भी कई विधायक सीपीएस बनने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हालांकि सरकार अब तक यही कहती आ रही है कि जरूरत के हिसाब से सरकार किसी भी नियुक्ति को लेकर फैसला करेगी।
आरटीआई कार्यकर्ता की याचिका के अनुसार हिमाचल में सीपीएस को हर महीने 65 हजार वेतन मिलता है। इसके अलावा बतौर विधानसभा क्षेत्र भत्ता 90 हजार, दैनिक भत्ता 1800, ऑफिस भत्ता 30 हजार, कंप्यूटर डाटा आपरेटर के लिए 15 हजार भत्ता मिलता है।