उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को भी अपने व्यवसाय का इमानदारी के साथ निर्वहन करना चाहिए, ताकि कोई पीड़ित व्यक्ति अव्यवस्था का शिकार न बने। उन्होंने कहा कि 108 राष्ट्रीय एंबुलेस सेवा में भी सुधार की आवश्यकता है।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने उनका स्वागत किया। उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता अशोक शर्मा, पूर्व महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने भी सुझाव दिए। विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं प्रबंध निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पंकज राय ने धन्यवाद किया।
आईजीएमसी के डा. राजीव रैणा ने जेनेरिक तथा ब्रांडेड दवाओं में अंतर और गुणवत्ता के बारे जानकारी देते हुए कहा कि वास्तव में इन दोनों की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है। डा. गोपाल बेरी उपनिदेशक स्वास्थ्य ने निशुल्क दवा नीति पर प्रस्तुति दी।
उन्होंने कहा कि भारत में उपलब्ध हर तीसरी दवा का निर्माण हिमाचल प्रदेश में किया जा रहा है। कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिकारी, स्वास्थ्य निदेशक डा. बलदेव ठाकुर, पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि, चिकित्सक, विधि विश्वविद्यालय, कॉलेजों के विद्यार्थी तथा अन्य हितधारक मौजूद रहे।