शिक्षा निदेशालय के ध्यान में मामला लाया जाए। बच्चों और अभिभावकों को भी यौन शोषण के प्रति जागरूक किया जाए। जिलों को जारी पत्र में कहा गया है कि यौन शोषण के मामले ध्यान में आते ही विशेष ज्यूविनाइल पुलिस यूनिट या स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाए। निदेशक रोहित जम्वाल ने बताया कि यौन शोषण के मामलों में लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पोक्सो एक्ट के सेक्शन 19 और 20 में स्पष्ट किया गया है कि अगर स्कूल में सामने आए यौन शोषण की जानकारी पुलिस को नहीं दी जाती है तो स्थानीय स्कूल के संबंधित शिक्षक और प्रभारी को छह माह से लेकर एक साल की जेल और जुर्माना होगा।
उन्होंने कहा कि जागरूक करने के लिए स्कूलों में प्रतिमाह एसएमसी और शिक्षकों की बैठक की जाए। स्कूलों में मामलों की शिकायत करने के लिए चाइल्ड टोल फ्री नंबर 1098 प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए। नेशनल कमीशन आफ प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट की वेबसाइट पर जाकर ई बाक्स लिंक में भी शिकायत करने की बच्चों को जानकारी दी जाए।