वित्त वर्ष 2023-24 से जुलाई 2026 तक हुई वसूली में सबसे बड़ा हिस्सा बिजली शुल्क का रहा। इससे 1815.77 करोड़ रुपये जुटाए गए। वहीं, स्वच्छता उपकर से 163.44 करोड़, दूध उपकर से 146.79 करोड़ और नगर पालिका कर से 14 करोड़ रुपये वसूले गए। पर्यावरण उपकर के रूप में 2.18 करोड़ और बैंकिंग, बीमा, वाणिज्यिक वित्त उपकर से 4.86 करोड़ रुपये मिले।
2023-24 में उपभोक्ताओं से 482.89 करोड़ रुपये शुल्क के रूप में वसूले गए। 2024-25 में यह बढ़कर 636.15 करोड़ और 2025-26 में 756.06 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह तीन वर्षों में सबसे अधिक रहा। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई तक ही 269.33 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। यानी पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले शुरुआती चार महीनों में ही बड़ी राशि बिलों के माध्यम से जुटाई गई है।