बिजली बोर्ड ने 35 साल पहले इस परिवार के घर की छत काटकर हाईटेंशन लाइन का बिजली का खंभा खड़ा कर दिया। उस समय घर की सिर्फ एक मंजिल थी। यह मामला साल 1986 का है। जब बोर्ड ने खंभा यहां खड़ा किया तब परिवार बाहर रहता था। जब परिवार के लोग घर वापस आए तो खंभा देखकर हैरान रह गए।
सरकारी विभागों के कामकाज के तरीके से आम आदमी किस कदर परेशान होता है। इसका उदाहरण किन्नौर के शांगो गांव का एक परिवार है। बिजली बोर्ड ने 35 साल पहले इस परिवार के घर की छत काटकर हाईटेंशन लाइन का बिजली का खंभा खड़ा कर दिया। उस समय घर की सिर्फ एक मंजिल थी। यह मामला साल 1986 का है। जब बोर्ड ने खंभा यहां खड़ा किया तब परिवार बाहर रहता था। जब परिवार के लोग घर वापस आए तो खंभा देखकर हैरान रह गए।
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परिवार के मुखिया चंदु राम नेगी ने (अब इस दुनिया में नहीं) बोर्ड से खंभा हटाने की अपील की। उनकी अपील पर बोर्ड ने कान बंद कर दिए जो आज तक नहीं खुले। 35 साल हो गए। बोर्ड से गुहार लगाते-लगाते चंदु राम दुनिया से चल बसे, पर खंभा अभी वहीं है। चंदु राम के बाद घर के दूसरे लोग बार-बार खंभा हटाने की मांग करते रहे, लेकिन इनकी सुनवाई आज तक नहीं हुई। एक मंजिला मकान छोटा था, तो परिवार ने ऊपर की दो और मंजिलें बनवा लीं।
इन दो मंजिलों की छत खंभे से हिसाब से काटनी पड़ी है। स्व. चंदु राम की पत्नी बसंती देवी ने बताया कि उनके पति और वह 35 साल से खंभा हटाने की मांग कर रहे हैं। बिजली बोर्ड ने जब यह खंभा उनके घर में लगाया, तब वे घर पर नहीं रहते थे। उनका परिवार झाकड़ी में रहता था। बसंती देवी ने कहा कि जीवन भर की कमाई से पाई-पाई जोड़कर घर बनाया। मगर अब उन्हें उस घर पर एक पल भी गुजारना खतरे से खाली नहीं है।
बारिश में लगते है करंट के झटके, पुराने मकान में रहना मजबूरी
बारिश के समय घर पर करंट के झटके महसूस होते हैं। इस कारण बारिश के समय वह परिवार सहित पुराने मकान में रहने को मजबूर हैं। बिजली बोर्ड भावानगर के सहायक अभियंता आशीष ने बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला लाया गया है। बिजली के खंभे को बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए लोग जमीन नहीं दे रहे। वे अधिकारियों से बात करेंगे। जल्द ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।