मांगें पूरा करने के लिए कर्मचारी लगातार आवाज उठाते आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश की आबादी 80 लाख के करीब है। आंकड़ों पर गौर करें तो हिमाचल में ढाई लाख कर्मचारी और डेढ़ लाख के करीब पेंशनर हैं। इसके अलावा सिंचाई अध्यापिका, आंगनबाडी़, कार्यकर्ता, मल्टी टास्क वर्कर, जलवाहक, पैरा फीटर, आशा वर्कर, पंचायत चौकीदार, राजस्व चौकीदार, नंबरदार आदि को मिलाकर ये आंकड़ा दो लाख और बढ़ जाता है। प्रदेश सरकार की ओर से हर बार बजट में कर्मचारियों को कुछ न कुछ राहत दी जाती है। इस बार लोक निर्माण विभाग में मल्टी टास्क वर्कर के मानदेय में बढ़ोतरी न होने मामला सदन में गूंजा, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट पारित होने के तीसरे दिन ही इनके मानदेय में 500 रुपये बढ़ोतरी की घोषणा कर मामले को बढ़ने नहीं दिया।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पाॅलिसी बनाना सबसे बड़ा मुद्दा
हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का बड़ा मुद्दा रहा है। विभागों में 30 हजार के करीब आउटसोर्स कर्मचारी हैं। ये कर्मचारी पाॅलिसी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सुक्खू सरकार ने बजट में कर्मचारियों को 12,000 रुपये मानदेय देने की घोषणा की है।
बजट का हिस्सा सरकारी नौकरी के लिए
सरकार के बजट का अधिकांश हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च होता है। तीन फीसदी हिस्सा सरकारी नौकरी में है। मुख्य कार्य के लिए 9.89 फीसदी रुपये की राशि रहती है। हिमाचल की राजनीति पर नजर दौड़ाएं तो अभी तक के इतिहास में भाजपा और कांग्रेस पार्टी की सरकार रिपीट नहीं कर पाई
वापस लाएं एनपीएस के 9 हजार करोड़
अनुबंध को सेवाकाल में जोड़ना, साल में दो बार कर्मचारियों को नियमित करना, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 60 साल में सेवानिवृत्त करना, केंद्र से एनपीएस के 9 हजार करोड़ रुपये वापस लाने जैसी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। ओल्ड पेंशन स्कीम, एसएमसी, कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने की पाॅलिसी से भी कर्मचारी खुश हैं। -प्रदीप ठाकुर, अध्यक्ष कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश
सरकार ने कर्मचारियों के साथ किया धोखा
कर्मचारियों का डीए और एरियर लंबित है। इससे कर्मचारियों को 10 हजार का नुकसान हो रहा है। एरियर को लेकर भी कर्मियों से धोखा हुआ। पहले अधिसूचना जारी की गई, बाद में वापस ले ली। डेढ़ साल में कर्मियों की डिमांड पूरी नहीं हुई। अध्यापकों को हर साल सम्मान मिलता था, उसे भी सरकार ने बंद कर दिया। -मामराज पुंडीर, महामंत्री भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ