फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चुनाव मुद्दा: हिमाचल में सरकारी कर्मियों को ओपीएस मिलना शुरू ; डीए, एरियर समेत कई मांगें अभी भी अधूरी

Wed, 27 Mar 2024 11:08 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

किसान-बागवानों के बाद कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ा वर्ग माना जाता है। कर्मचारी हिमाचल के हर घर को प्रभावित करता है। 
विज्ञापन
पुरानी पेंशन योजना - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल की राजनीति कर्मचारियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। किसान-बागवानों के बाद कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ा वर्ग माना जाता है। कर्मचारी हिमाचल के हर घर को प्रभावित करता है। अधिकांश घरों में कोई न कोई सरकारी क्षेत्र में सेवाएं दे रहा है, ऐसे में पार्टी के नेता भी कर्मियों को खुश करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। सत्ता पलटने, नई सरकार चुनने में इनका बड़ा हाथ रहता है। कांग्रेस पार्टी भी कर्मचारियों के बलबूते सत्ता में आई है। विस चुनाव से पहले की कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम, कंप्यूटर और एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने, विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती जैसी घोषणा को सिरे चढ़ाकर कांग्रेस ने कर्मियों का विश्वास जीतने की कोशिश जरूर की है लेकिन लंबित 12% डीए, एरियर का भुगतान, अनुबंध काल को सेवाकाल में जोड़ने, साल में दो बार नियमित करने आदि मांगें पूरी नहीं हो पाईं।

विज्ञापन

मांगें पूरा करने के लिए कर्मचारी लगातार आवाज उठाते आ रहे हैं।  हिमाचल प्रदेश की आबादी 80 लाख के करीब है। आंकड़ों पर गौर करें तो हिमाचल में ढाई लाख कर्मचारी और डेढ़ लाख के करीब पेंशनर हैं। इसके अलावा सिंचाई अध्यापिका, आंगनबाडी़, कार्यकर्ता, मल्टी टास्क वर्कर, जलवाहक, पैरा फीटर, आशा वर्कर, पंचायत चौकीदार, राजस्व चौकीदार, नंबरदार आदि को मिलाकर ये आंकड़ा दो लाख और बढ़ जाता है। प्रदेश सरकार की ओर से हर बार बजट में कर्मचारियों को कुछ न कुछ राहत दी जाती है। इस बार लोक निर्माण विभाग में मल्टी टास्क वर्कर के मानदेय में बढ़ोतरी न होने मामला सदन में गूंजा, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट पारित होने के तीसरे दिन ही इनके मानदेय में 500 रुपये बढ़ोतरी की घोषणा कर मामले को बढ़ने नहीं दिया।  

100 में से वेतन पर 25, पेंशन पर जाते हैं 17 रुपये
वर्ष 2024 -25 के बजट के अनुसार 100 रुपये में से वेतन पर 25 रुपये, पेंशन पर 17 रुपये और संस्थानों की ग्रांट पर 10 रुपये और शेष 28 रुपये पूंजीगत कार्यों सहित अन्य गतिविधियों पर पर व्यय किए जाते हैं।  


 

आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए पाॅलिसी बनाना सबसे बड़ा मुद्दा
हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का बड़ा मुद्दा रहा है। विभागों में 30 हजार के करीब आउटसोर्स कर्मचारी हैं। ये कर्मचारी पाॅलिसी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सुक्खू सरकार ने बजट में कर्मचारियों को 12,000 रुपये मानदेय देने की घोषणा की है। 

 बजट का हिस्सा सरकारी नौकरी के लिए
सरकार के बजट का अधिकांश हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर खर्च होता है। तीन फीसदी हिस्सा सरकारी नौकरी में है। मुख्य कार्य के लिए 9.89 फीसदी रुपये की राशि रहती है। हिमाचल की राजनीति पर नजर दौड़ाएं तो अभी तक के इतिहास में भाजपा और कांग्रेस पार्टी की सरकार रिपीट नहीं कर पाई 

वापस लाएं एनपीएस के 9 हजार करोड़ 
अनुबंध को सेवाकाल में जोड़ना, साल में दो बार कर्मचारियों को नियमित करना, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 60 साल में सेवानिवृत्त करना, केंद्र से एनपीएस के 9 हजार करोड़ रुपये वापस लाने जैसी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। ओल्ड पेंशन स्कीम, एसएमसी, कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने की पाॅलिसी से भी कर्मचारी खुश हैं। -प्रदीप ठाकुर, अध्यक्ष कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश 
विज्ञापन

सरकार ने कर्मचारियों के साथ किया धोखा 
कर्मचारियों का डीए और एरियर लंबित है। इससे कर्मचारियों को 10 हजार का नुकसान हो रहा है। एरियर को लेकर भी कर्मियों से धोखा हुआ। पहले अधिसूचना जारी की गई, बाद में वापस ले ली। डेढ़ साल में कर्मियों की डिमांड पूरी नहीं हुई। अध्यापकों को हर साल सम्मान मिलता था, उसे भी सरकार ने बंद कर दिया। -मामराज पुंडीर, महामंत्री भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें