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Himachal Election: टिकट तय करने के लिए कांग्रेस फूंक-फूंककर रख रही कदम

Sun, 07 Apr 2024 05:00 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल,शिमला

सार

प्रत्याशियों के चयन के लिए कांग्रेस हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। अंतिम चरण में हिमाचल के चुनाव होने से भाजपा की हर बिसात पर नजर रखने के लिए कांग्रेस को पर्याप्त समय मिल रहा है। 
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सुक्खू, प्रतिभा, मुकेश, चंद्र कुमार। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल में टिकट तय करने में कांग्रेस जल्दबाजी नहीं दिखा रही है। प्रत्याशियों के चयन के लिए कांग्रेस हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। अंतिम चरण में हिमाचल के चुनाव होने से भाजपा की हर बिसात पर नजर रखने के लिए कांग्रेस को पर्याप्त समय मिल रहा है। 11 अप्रैल को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लोकसभा के प्रत्याशी तय होने की संभावना है। कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारे जाने वाले प्रत्याशियों को लेकर पार्टी में लगभग सहमति बनती दिख रही है।

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शिमला को लेकर भी दो-तीन दिन में एक राय बनने के आसार हैं। लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के लिए जिताऊ प्रत्याशी तलाशने को जनता की नब्ज टटोल कर करवाए गए सर्वे को पार्टी पूरा अधिमान दे रही है। इसके चलते ही मंडी से विक्रमादित्य सिंह और कांगड़ा से आशा कुमारी के नाम आगे किए गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा कि कांग्रेस की ओर से मजबूत प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा।

सुजानपुर, लाहौल-स्पीति और बड़सर में सेकंड लाइन नेताओं की तलाश
विधानसभा के उपचुनावों के लिए कांग्रेस अपने नेताओं को जीत की क्षमता, संगठन के प्रति समर्पण और बेदाग छवि के पैमाने पर परख रही है। धर्मशाला से देवेंद्र जग्गी और कुटलैहड़ से विवेक शर्मा को प्रत्याशी बनाने का फैसला लगभग हो चुका है। सुजानपुर, लाहौल-स्पीति और बड़सर में सेकेंड लाइन के नेताओं की तलाश है। तीनों विधानसभा क्षेत्रों में एक माह पहले तक कांग्रेस के पास जो नामी चेहरे थे, अब वे तीनों बागी होकर भाजपा में शामिल हो गए हैं।

सुजानपुर से राजेंद्र राणा, बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल और लाहौल-स्पीति से रवि ठाकुर बीते 12 वर्षों से अपने-अपने क्षेत्रों में कांग्रेस के अच्छी कद-काठी वाले नेताओं के रूप में जम चुके थे। इस कारण यहां पर तीनों ने कांग्रेस की सेकेंड लाइन को अपने समानांतर उभरने नहीं दिया। अब यहां उपचुनाव होने के चलते कांग्रेस को नए सिरे से जिताऊ उम्मीदवार तलाशने के लिए मंथन करना पड़ रहा है। गगरेट में कांग्रेस के लिए मजबूत प्रत्याशी तलाशना बड़ी परेशानी नहीं है। वर्ष 2022 के चुनाव में ही यहां से चैतन्य शर्मा को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था। यहां कुलदीप कुमार और भाजपा छोड़ने वाले राकेश कालिया का विकल्प कांग्रेस के पास है।

प्रतिभा सिंह हमारी अध्यक्ष, वह ही आगे करती हैं नाम
केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशियों के नाम फाइनल होंगे। विधानसभा उपचुनाव के लिए भी प्रत्याशियों के नाम जल्द तय होंगे। प्रतिभा सिंह हमारी प्रदेश अध्यक्ष हैं, उन्हीं की ओर से चुनाव लड़ने वालों के नाम आगे किए जाते हैं। उनके नाम सहित अन्य नामों पर भी चर्चा हुई है। -सुखविंद्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल

कांग्रेस जीतने के लिए लड़ेगी चुनाव
कांग्रेस पार्टी जीतने के लिए चुनाव लड़ेगी। मंडी संसदीय क्षेत्र सहित सभी लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में पूरी मजबूती के साथ संगठन और सरकार प्रचार करेंगे। जल्द ही केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशियों के नाम तय होंगे। -विक्रमादित्य सिंह, लोक निर्माण मंत्री
 

सरकार-संगठन में न मतभेद न मनभेद
हिमाचल सरकार बहुमत में है। भाजपा के पास 25 और कांग्रेस के पास 34 विधायक हैं। तीन निर्दलीय विधायकों को लेकर फैसला विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है। लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में जीतने की क्षमता रखने वाले प्रत्याशी उतारे जाएंगे। पांच-पांच नेताओं ने टिकट के लिए आवेदन किए हैं। सरकार और संगठन में न कोई मतभेद है और ना ही कोई मनभेद।-कौल सिंह ठाकुर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
 

सुलझा ली है मंडी सीट को लेकर गुत्थी : शुक्ल
मंडी संसदीय सीट को लेकर पार्टी ने गुत्थी सुलझा दी है। जल्द ही यहां से मजबूत प्रत्याशी मैदान में उतारा जाएगा। अन्य सीटों के लिए भी जल्द प्रत्याशी घोषित होंगे। भाजपा हमारी न्याय गारंटियों से घबराहट में है। इसी कारण इनके नेता बौखला कर अनाप शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। -राजीव शुक्ल, प्रभारी प्रदेश कांग्रेस

पुरानी बातें भुलाकर एकजुटता से नई रणनीति पर चलने का संदेश
शनिवार को नई दिल्ली में हुई कांग्रेस की समन्वय समिति की बैठक में पुरानी बातें भुलाकर एकजुटता से नई रणनीति पर चलने का हिमाचल प्रदेश के नेताओं को संदेश दिया गया। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ल ने पूर्व में हो चुकी गलतियों को दोबारा से नहीं दोहराने का पाठ भी पढ़ाया। स्पष्ट तौर पर कहा कि सार्वजनिक तौर पर किसी भी मतभेद को लेकर बयानबाजी न की जाए। पार्टी के फोरम पर इन मामलों को उठाया जाए ताकि समय रहते गिले-शिकवे दूर किए जाए।
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बहुमत बनाए रखने को लेकर भी हुई चर्चा
प्रदेश में कांग्रेस सरकार को पूरे पांच साल तक बहुमत में बनाए रखने के लिए भी चर्चा हुई। मंत्री विक्रमादित्य सिंह के चुनाव लड़ने की स्थिति में सदन में विधायकों की संख्या पर क्या असर पड़ेगा, इस पर भी मंथन हुआ। सदन में विधायकों की संख्या 62 है। कांग्रेस के पास 34, भाजपा के पास 25 विधायक हैं। तीन निर्दलीय विधायकों ने इस्तीफे दे दिए हैं लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफे मंजूर नहीं किए हैं। छह विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने जा रहे हैं। लाेकसभा चुनाव में अगर विक्रमादित्य सिंह चुनाव जीतते हैं तो सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या 34 से घटकर 33 रह जाएगी। उपचुनाव में कांग्रेस कितनी सीटों पर जीत दर्ज कर सदन में बहुमत को कायम रख सकेगी, इसको लेकर भी मंथन किया गया।
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