नौवीं सदी के पौराणिक मंदिर।
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गोबिंद सागर झील में जलमग्न पौराणिक मंदिरों के लिए हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से 1,500 करोड़ रुपये लागत की महत्वाकांक्षी परियोजना तीन चरणों में क्रियान्वित की जाएगी। गुजरात के गांधीनगर के पास सरदार सरोवर प्रोजेक्ट और यूपी के वाराणसी में बनाए गए कॉरिडोर के मॉडल को स्टडी कर इस परियोजना को पूर्ण रूप दिया जाएगा। पहले चरण में नाले के नौण को डेवलप कर मंदिरों को अपलिफ्ट किया जाएगा और दूसरे चरण में सांडू के मैदान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना है, जबकि तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट और वॉक वेज इत्यादि विकसित किए जाएंगे।
मिट्टी के सैंपल पास, बजट प्रस्ताव पर्यटक विभाग को भेजा
हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के चीफ इंजीनियर पवन शर्मा ने कहा कि मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 1,500 करोड़ की परियोजना पर काम शुरू हो गया है। मंदिरों को लिफ्ट करने के लिए दो जगह से मिट्टी के सैंपल लिए गए थे। दोनों सैंपल पास हो गए हैं। नाले के नौण में लिफ्ट होने वाले मंदिरों का मॉड्यूल भी आ गया है। इसके लिए 105 करोड़ का बजट चाहिए। उन्होंने बजट प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेज दिया है। अभी झील का पानी भरा है। जैसे ही पानी उतरेगा अन्य जगह से भी मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे।