उम्र बढ़ने के साथ दांतों की नियमित सफाई और देखभाल में लापरवाही बुजुर्गों के लिए भारी पड़ रही है। हिमाचल प्रदेश में 60 से 102 वर्ष आयु के बुजुर्गों पर किए गए एक अध्ययन में ओरल हेल्थ को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अध्ययन में 63.7 फीसदी बुजुर्गों में मसूड़ों की बीमारी यानी पायरिया, जबकि 78.4 फीसदी में दांतों की सड़न पाई गई।
डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला के पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग के चिकित्सकों डॉ. विनय भारद्वाज, डॉ. रुचि वर्मा, डॉ. शैली फोतेदार, डॉ. अरुण सिंह ठाकुर और डॉ. अक्षय ठाकुर ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में 60 से 102 वर्ष आयु के 102 बुजुर्गों की जांच की। वर्ष 2025 से 2026 के बीच किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष जुलाई 2026 में इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुए हैं।
दांतों की सड़न के मामले ज्यादा
अध्ययन के अनुसार 78.4 फीसदी बुजुर्गों में दांतों में सड़न की समस्या पाई गई। वहीं 63.7 फीसदी बुजुर्ग मसूड़ों की बीमारी यानी पायरिया से प्रभावित मिले। इसके अलावा खराब, गायब और भरे हुए दांतों से संबंधित मामलों का आंकड़ा भी 17.69 फीसदी रहा।
अध्ययन में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में दांतों से संबंधित बीमारियों का स्तर अधिक पाया गया। करीब 78.8 फीसदी महिलाएं और 80 फीसदी पुरुष किसी न किसी दंत बीमारी से प्रभावित मिले।
कई बुजुर्ग नियमित ब्रश भी नहीं करते
अध्ययन में सामने आया कि कई बुजुर्ग दिन में केवल एक बार ब्रश करते हैं, जबकि कुछ बुजुर्ग ऐसे भी हैं जो किन्हीं कारणों से नियमित रूप से ब्रश नहीं करते। इससे दांतों में सड़न और दांतों के झड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
अध्ययन के अनुसार जिन बुजुर्गों की मौखिक स्वच्छता बेहतर नहीं थी, उनमें दांतों के झड़ने और सड़न का खतरा अधिक पाया गया। किसी भी बुजुर्ग ने इंटरडेंटल ब्रश या अन्य मौखिक स्वच्छता उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया था। समय पर दंत चिकित्सक से जांच न करवाने के पीछे वित्तीय बाधाएं भी एक कारण सामने आईं।