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शिक्षिकाओं ने की शर्मनाक हरकत, सोशल मीडिया पर मासूम बच्चियों के फोटो वायरल

Sat, 25 Nov 2017 04:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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गुरु शिष्य परंपरा का उपहास उड़ाने का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल की दो शिक्षिकाएं कक्षा दो और तीन में पढ़ने वाली मासूम बच्चियों से पथरीले और पहाड़ी रास्ते पर अपना पर्स और बैग उठवाती पाई गई हैं।
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दोनों बच्चियां पीठ पर अपना स्कूल बस्ता उठाए हुए थीं जबकि दोनों के एक-एक हाथ में मैडम का पर्स और दूसरे में बैग टंगा हुआ था। क्रूरता की हद तो तब पार कर ली, जब दोनों शिक्षिकाएं टहलती हुईं बच्चियों के पीछे-पीछे चली आ रही थीं।

इसका खुलासा सोशल मीडिया पर जारी एक तस्वीर से हुआ। जिला बिलासपुर के एक प्राइमरी स्कूल की इन दोनों शिक्षिकाओं को अब कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
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जांच हुई तो खुली परतें

सोलह दिन पहले सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई थी। यह फोटो कहां की है? इसको लेकर सिर्फ अटकलें लग रही थीं। वायरल फोटो प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के हाथ भी लगी।

निदेशालय ने संज्ञान लेते हुए सभी जिला उपनिदेशकों को फोटो भेज कर इसकी पड़ताल के आदेश दिए। शुक्रवार को जिला बिलासपुर के उपनिदेशक ने निदेशालय में रिपोर्ट भेजकर बताया कि यह फोटो उनके जिला के एक स्कूल में पढ़ने वाली बच्चियों और उनको पढ़ाने वाली दो शिक्षिकाओं की हैं।

जिला से रिपोर्ट आते ही निदेशक मनमोहन शर्मा ने फौरन दोनों शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है।

बर्दाश्त नहीं करेंगे ऐसे मामले

हिमाचल प्रदेश सरकार
इस तरह के मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षकों से इस तरह का व्यवहार अपेक्षित नहीं है। बच्चों से निजी काम करवाना शर्मनाक है। निदेशालय मामले में शिक्षिकाओं के दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई करेगा। इस संदर्भ में सभी स्कूलों को एडवाइजरी जारी की जाएगी। - मनमोहन शर्मा, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा


बच्चों को संस्कारी शिक्षा देना शिक्षकों का दायित्व है। यह घटना निंदनीय है। जैसे हम अपने बच्चों की देखभाल करते हैं, वैसे ही हमें स्कूलों में भी बच्चों के साथ व्यवहार करना चाहिए। यह घटना समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं है। शिक्षक समाज का आईना होते हैं। सभी लोगों की हमारी गतिविधियों पर पैनी नजर रहती है। - वीरेंद्र चौहान, अध्यक्ष राजकीय अध्यापक संघ
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इस तरह के मामले भी आए हैं सामने

बच्चों से मिड डे मील का राशन, पानी ढुलवाना 
मिड डे मील बनाने के लिए बच्चों से लकडि़यां एकत्रित करवाना
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