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HP Economic Survey: हिमाचल में 2,57,212 रुपये हुई प्रतिव्यक्ति आय, जानिए आर्थिक सर्वेक्षण की बड़ीं बातें

Thu, 13 Mar 2025 07:59 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदन में आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25  पेश किया । जानिए आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 की मुख्य विशेषताएं क्या हैं...
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हिमाचल आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल में प्रतिव्यक्ति आय 2,57,212 रुपये हो गई है। इसमें 9.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में 22,430 रुपये बढ़ी है। राज्य के प्रति व्यक्ति आय में 2011-12 में 87,721 से 2024-25 में 2,57,212 की बढ़ोतरी हुई है, जोकि 2011-12 की तुलना में 8.6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्शाती है। हिमाचल में आर्थिक विकास दर में भी वृद्धि हुई है। 2024-25 में विकास दर 6.7 प्रतिशत हो गई, जबकि 2023-24 में 6.6 प्रतिशत थी। यह देश की विकास दर से अधिक है। देश में यह 6.4 प्रतिशत है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 15.2 प्रतिशत है। इसमें कृषि, पशुधन, वानिकी, खनन आते हैं।

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द्वितीयक क्षेत्र यानी विनिर्माण, बिजली, जलापूर्ति का 39.5 और तृतीयक क्षेत्र व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, रियल एस्टेट, सेवाओं आदि का 45.3 प्रतिशत रहा। प्राथमिक क्षेत्र में वृद्धि दर 3.2, द्वितीयक में यह 8.1 और तृतीयक में 5.9 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह खुलासा गुरुवार को हिमाचल प्रदेश की आर्थिक सर्वेक्षण (2024-25) रिपोर्ट में हुआ है। मुख्यमंत्री की तरफ से उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन के पटल पर रिपोर्ट रखी।
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वास्तविक जीएसडीपी 1,46,553 करोड़ अनुमानित
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी 2,32,185 करोड़ रहने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह 2,10,662 करोड़ था। यह 10.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है। वर्ष 2024-25 में स्थिर भावों पर वास्तविक जीएसडीपी 1,46,553 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में यह 1,37,320 करोड़ था। यह 6.7 प्रतिशत वृद्धि दर प्रदर्शित करता है। वित्त वर्ष 2024-25 के अनुसार प्राथमिक क्षेत्र से जीएसवीए 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ स्थिर मूल्यों पर वित्त वर्ष 2023-24 में आरएस 16,116 करोड़ की तुलना के 16,625 करोड़ अनुमानित है।

द्वितीयक क्षेत्र के जीएसबीए में  8.1 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद
वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनुसार द्वितीयक क्षेत्र का जीएसबीए स्थिर (2011-12) मूल्यों पर वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए आरएस 60,238 करोड़ के मुकाबले 65,134 करोड़ अनुमानित है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 8.1 प्रतिशत वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनुसार सेवा क्षेत्र का जीएसवीए स्थिर (2011-12) भावों पर 56,654 करोड़ अनुमानित है, जबकि वित्त वर्ष 2023-24  में यह 53.481 करोड़ था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है।

कृषि और संबद्ध क्षेत्र में 3.07 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल राज्य मूल्य वर्धित (जीएसवीए) में योगदान 2020-21 के 20,838 करोड़ के मुकाबले 2024-25 के अनुसार 31,879 करोड़ रुपये हो गया। इसमें 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फसल क्षेत्र का योगदान इसी अवधि में 78 प्रतिशत बढ़ा है। स्थिर मूल्यों पर 3.07 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2023-24 में -2.63 प्रतिशत की थी। 2024-25 में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का जीएसवीए का 9.24 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2024-25 में पशुधन उपक्षेत्र का योगदान कुल जीएसवीए का 1.36 प्रतिशत रहा। पशुधन उप क्षेत्र की वृद्धि दर 2024-25 में 5.2 प्रतिशत हो गई है।

औद्योगिक क्षेत्र में जीएसवीए 8.1 प्रतिशत बढ़ने की आशा
2024-25 के अग्रिम भुगतान के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र का खनन और उत्खनन सहित कुल जीएसवीए प्रचलित भावाें पर 86,695 करोड़ रुपये अनुमानित है। जीएसवीए में प्रचलित भावों पर औद्योगिक क्षेत्र का योगदान वित्तीय वर्ष 2024-25 में 40 प्रतिशत है। इसमें 26.19 प्रतिशत विनिर्माण से, 7.68 प्रतिशत निर्माण, 5.66 प्रतिशत बिजली, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवा में आता है। अग्रिम अनुमान के अनुसार प्रदेश में वित्त वर्ष 2024-25 में औद्योगिक क्षेत्र की जीएसवीए 8.1 प्रतिशत बढ़ने की आशा है। इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक क्षेत्र का जीएसवीए स्थिर भावों पर 6.5 प्रतिशत बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि होने की आशा है।
 

हिमाचल में बढ़े पर्यटक, पिछले साल पहुंचे 181.24 लाख सैलानी
 हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या कोविडकाल के पूर्व स्तर पर पहुंच रही है। वीरवार को विधानसभा में प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में इस बाबत जानकारी दी गई है। कोविड से पूर्व 2019 में हिमाचल के पर्यटन स्थलों में 168.29 लाख भारतीय और 3.83 लाख विदेशी और कुल 172.12 लाख पर्यटक पहुंचे थे। 2020 में भारतीय पर्यटकों की संख्या घट कर 31.70 लाख और विदेशी पर्यटकों की संख्या 43 हजार रह गई। 2020 में कुल 32.13 लाख पर्यटक ही हिमाचल पहुंचे। 2021 में 56.32 लाख भारतीय, महज 0.05 लाख विदेशी और कुल 56.37 लाख पर्यटक पहुंचे। 2022 में 150.70 लाख भारतीय, 0.29 लाख विदेशी कुल 150.99 पर्यटक पहुंचे। 2023 में 159.42 भारतीय, 0.63 लाख विदेशी कुल 160.05 लाख पर्यटक पहुंचे। 2024 में दिसंबर माह तक 180.41 लाख भारतीय, 0.83 लाख विदेशी और कुल 181.24 लाख पर्यटक हिमाचल पहुंचे हैं।

ऊर्जा
 राज्य में कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं जो इसकी नदियों की ऊर्जा का उपयोग करती हैं व क्षेत्र की बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में जलविद्युत संसाधन है, राज्य में पांच बारहमासी नदी घाटियों पर विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण से 24,000 मेगावाट जलविद्युत पैदा की जा सकती है जोकि राष्ट्रीय क्षमता का लगभग 25 प्रतिशत है। राज्य की कुल जलविद्युत क्षमता में से अब तक 11.290 मेगावाट का दोहन किया जाता है।

हिमाचल में महंगाई दर अपेक्षाकृत स्थिर रही
हिमाचल प्रदेश के मामले में महंगाई दर अपेक्षाकृत स्थिर रही है। वित्त वर्ष 2023-24 की सीपीआई-सी मुद्रास्फीति 5.0 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024-25 में 4.2 प्रतिशत हो गई है। इसी समय अवधि में सीपीआई-ग्रामीण मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत और सीपीआई शहरी मुद्रास्फीति 4.7 प्रतिशत से घटकर 3.3 प्रतिशत हो गई है।

 

सामाजिक सेवाएं
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 115 सिविल अस्पतालों, 106 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, 585 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, 24 ईएसआई सिविल डिस्पेंसरियों और 2.114 स्वास्थ्य उप केंद्रों सहित स्वास्थ्य सुविधाओं के एक सुस्थापित नेटवर्क की उपस्थिति के साथ उपचारात्मक, निवारक और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया है। प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर और बाहर यात्री परिवहन सेवाएं हिमाचल पथ परिवहन निगम  की ओर से 3,079 बसों, 110 इलेक्ट्रिक, 38 टैक्सियों, 50 इलेक्ट्रिक टैक्सियों और 12 टेंपो ट्रैवलर के बेड़े के साथ प्रदान की जा रही हैं।

रोजगार दिलाने में हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्यों से अव्वल
 रोजगार दिलाने में हिमाचल प्रदेश पड़ोसी राज्यों और भारत के औसत से बेहतर रहा है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2023-24 के अनुसार समस्त आयु की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) हिमाचल प्रदेश के लिए 60.5, उत्तराखंड के लिए 46.2, पंजाब के लिए 43.7, हरियाणा के लिए 37.4 और भारत में 45.1 प्रतिशत रही है। महिलाओं के लिए यह दर उत्तराखंड को छोड़कर इन राज्यों और पूरे भारत से आगे रही है। यह दोगुने से अधिक रही है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से किया गया है। 
 

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2023-24 में श्रमिक जनसंख्या अनुपात समस्त आयु वर्ग में हिमाचल प्रदेश की स्थिति 57.2, उत्तराखंड की 44.2, पंजाब में 41.3. हरियाणा में 36.1 और पूरे भारत के औसत 43.7 से बेहतर है। सर्वेक्षण के नतीजों से स्पष्ट होता है कि हिमाचल प्रदेश में महिलाएं 51.8 प्रतिशत अखिल भारतीय स्तर पर और पड़ोसी राज्यों में अपने समकक्षों की तुलना में आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। श्रम बल में वे लोग शामिल होते हैं, जो या तो काम कर रहे हैं या कार्य के लिए उपलब्ध हैं। 2023-24 में प्रदेश में बेरोजगारी दर 5.4 प्रतिशत थी। सामान्य स्थिति में बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों के लिए 3.2 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 7.0 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में पुरुषों के लिए यह दर 4.8 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 18.2 प्रतिशत थी।
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प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 6,75,671
रोजगार केंद्र के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 6,75,671 है। इनमें सर्वाधिक कांगड़ा में 1,38,191 और उसके बाद मंडी में 1,35,106 बेरोजगार हैं। शिमला में 58,420, चंबा में 52,065, सिरमौर में 50,288, हमीरपुर में 49,159, ऊना में 45,538, बिलासपुर में 45,239, सोलन में 37,704, कुल्लू में 36,879, किन्नौर में 6,240 और लाहौल स्पीति में 4,177 पंजीकृत हैं। विशेष रोजगार कार्यालयों में 16,665 दिव्यांग कार्यरत हैं।
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