हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बयान से डॉक्टर भड़क गए हैं। इससे मामला सुलझने के बजाय और बिगड़ गया है। पिछले 12 दिनों से हड़ताल कर रहे डॉक्टरों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि 26 फरवरी को सभी डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। 27 फरवरी को होने वाले पल्स पोलियो अभियान में ये डॉक्टर अपनी सेवाएं देंगे। इसके बाद 28 फरवरी से डॉक्टर फिर सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे तक अस्पताल परिसर के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान रूटीन ओपीडी बंद रहेगी, लेकिन आपात सेवाएं जारी रहेंगी। सड़क हादसों में घायल होने वालों और गंभीर रोगियों का उपचार किया जाएगा। इसके लिए भी डॉक्टर हड़ताल के दौरान उपचार करने जाएंगे। डॉक्टरों के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाएंगी। गौर हो कि डॉक्टर पंजाब की तर्ज पर मूल वेतन पर नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) देने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वे रोज सुबह दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कर्मचारी यदि सहजता से अपनी मांगें रखेंगे तो उनकी बात मानी जाएगी। यदि कर्मचारी सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इधर, मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन के महासचिव डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि डॉक्टर पंजाब की तर्ज पर मूल वेतन पर एनपीए मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अभी दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल कर रहे हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारी कई बार मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिव से मिल चुके हैं, लेकिन आश्वासन ही मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे में डॉक्टरों ने 26 को सामूहिक हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। वहीं, ज्वाइंट एक्शन कमेटी के पदाधिकारी डॉ. राजेश सूद ने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शन करना सबका अधिकार है। मुख्यमंत्री का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है।