संगठन के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा कि बीते तीन वर्षों से वे मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक सहित प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों से लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं सरकारी मिडिल स्कूलों में 100 विद्यार्थियों की शर्त समाप्त करने की घोषणा की थी, लेकिन यह आज भी लागू है।
बलवंत सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्तर पर निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिकारी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। संगठन के सचिव विजय चौहान और कोषाध्यक्ष शक्ति प्रसाद ने बताया कि हाल ही में शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव से मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया गया था कि मिडिल स्कूलों में 100 विद्यार्थियों की शर्त हटाने का मामला कैबिनेट में ले जाया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।
संगठन ने चिंता जताई कि एक ओर सीबीएसई स्कूलों के मर्ज होने और नई व्यवस्था के चलते फाइन आर्ट्स के पद सीमित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बेरोजगारी झेल रहे ड्राइंग मास्टर उम्र की सीमा पार करते जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि दो वर्षीय ड्राइंग मास्टर डिप्लोमा धारकों को भी सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनके रोजगार के रास्ते खुल सकें। उपाध्यक्ष जगदीश ठाकुर ने मांग करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही कला विषय को अनिवार्य किया जाए, जैसा कि केंद्र सरकार के अधीन स्कूलों में लागू है।
उन्होंने कहा कि कलाध्यापक प्राथमिक स्तर पर अन्य विषय पढ़ाने में भी सक्षम हैं और इसके लिए सरकार को सकारात्मक पहल करनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बेरोजगार कलाध्यापकों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। संगठन का दावा है कि प्रदेश में लगभग 18 हजार बेरोजगार कला अध्यापक हैं, जो पूर्व में सरकार का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को पत्र भेजकर चुनाव के दौरान किए गए वादों की याद दिलाई जाएगी।