कोरोना पॉजिटिव(सांकेतिक तस्वीर)
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हिमाचल प्रदेश में बुधवार को दो और कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हो गई। कांगड़ा और बिलासपुर जिले के एक-एक संक्रमित ने दम तोड़ा। उधर, प्रदेश में कोरोना के 150 नए मामले आए हैं। शिमला जिले में 35, चंबा जिले में 24, मंडी 20, कांगड़ा 17, ऊना 18, बिलासपुर सात, कुल्लू छह, कन्नौर चार, सोलन तीन, हमीरपुर दो और सिरमौर में दो नए मामले आए हैं।
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में 169 मरीजों ने कोरोना को मात दी। अब प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 202123 पहुंच गया है। इनमें से अब तक 197006 संक्रमित ठीक हो चुके हैं। सक्रिय कोरोना मामले घटकर 1625 रह गए हैं। प्रदेश में अब तक 3461 संक्रमितों की मौत हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना की जांच के लिए 12789 लोगों के सैंपल लिए गए।
किस जिले मे कितने सक्रिय मामले
कांगड़ा 275
शिमला 264
सोलन 69
मंडी 182
चंबा 231
सिरमौर 72
ऊना 117
बिलासपुर 111
हमीरपुर 110
कुल्लू 140
किन्नौर 38
लाहौल-स्पीति 16
कुपोषण, हृदय और किडनी रोग से पीड़ित बच्चों को कोरोना का खतरा
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने बच्चों के लिए नया कोविड-19 रोकथाम और प्रबंधन प्रोटोकॉल जारी किया है। दो वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बच्चों को बार-बार हाथ धोने और कम से कम छह फीट की परस्पर दूरी और पांच वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बच्चों को घर से बाहर निकलते समय मास्क आवश्यक है। सामान्य स्वस्थ बच्चों की अपेक्षा कुपोषण, विशेष रूप से सक्षम, एचआईवी, हृदय, किडनी व लीवर आदि जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को कोविड-19 का अधिक खतरा होता है। बच्चों में व्यस्कों के समान ही कोविड के लक्षण पाए जाते हैं, जिनमें बुखार, ठंड लगना, खांसी, नाक बंद होना या नाक बहना, स्वाद में कमी या सांस लेने में कठिनाई, दस्त लगना और भूख कम होना शामिल हैं।
ऐसे कोई लक्षण पाए जाने पर बच्चों को डॉक्टर को दिखाना आवश्यक होता है, यदि कोई बच्चा कोविड पॉजिटिव पाया जाता है और डॉक्टर द्वारा उसे होम आइसोलेशन की सलाह दी जाती है, तो ऐसी स्थिति में माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी मापदंडों की निगरानी करनी चाहिए। जिसमें बच्चों की श्वसन दर की दिन में 2 से 3 बार गणना करना, त्वचा के नीले पडने व हर 4 घंटे में पेशाब व ऑक्सीजन लेवल तथा शरीर के तापमान की जांच करनाने, 24 घंटे में तरल पदार्थ का सेवन करना, आहार लेना और आहार चार्ट बनाने के साथ-साथ बच्चे की गतिविधियों की जांच करते रहना शामिल है।