एम्स निर्माण की धीमी गति को लेकर ठाकुर और चौहान ने कहा कि 1351 करोड़ रुपये के एम्स प्रोजेक्ट को पीएम ने बिलासपुर के मंच से 48 महीने में पूरा करने की डेड लाइन दी थी। हैरत की बात है कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय 1205 बीघा भूमि 2015 में एम्स के नाम करने के बावजूद निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ पाया है।
116 बीघा में अभी तक पशुपालन विभाग का फार्म चल रहा है। 426 बीघा वन भूमि की है। इसकी क्लीयरेंस के लिए प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई है। अभी तक एम्स भी मोदी सरकार का जुमला ही बना हुआ है।