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आनंद शर्मा के करवट बदलने से हिमाचल कांग्रेस में भी हलचल

Wed, 03 Mar 2021 01:40 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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कांग्रेस नेता आनंद शर्मा - फोटो : twitter.com/AnandSharmaINC
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा के करवट बदलने से प्रदेश कांग्रेस में भी हलचल मच गई है। शिमला के रहने वाले आनंद शर्मा का राज्य कांग्रेस की सियासत में भी खूब दखल रहता है। उनके मौजूदा सियासी पैंतरे का यहां की अगली सियासत पर असर पड़ने की चर्चा तेज है।

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वर्तमान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर हों या इसी कुर्सी पर छह साल से ज्यादा वक्त तक बैठने वाले उनके पूर्ववर्ती सुखविंद्र सिंह सुक्खू, इनकी नियुक्ति और कार्यशैली के तीखेपन में आनंद शर्मा का ही अभयदान रहा है।  इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) और कांग्रेस के बंगाल चुनाव में गठबंधन पर सवाल उठाने की बात आनंद शर्मा पार्टी हित में बता रहे हैं।

वहीं, जिस तरह बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने गुलाब नबी आजाद के साथ आनंद शर्मा पर भी भाजपा के ध्रुवीकरण को हवा देने के आरोप लगाए हैं, उसकी प्रदेश में भी खासी बहस छिड़ गई है। अगले साल राज्य मेें भी विधानसभा चुनाव हैं। आनंद के इस रुख का भविष्य जो भी हो, पर अभी से प्रदेश कांग्रेस की अगली सियासत पर भी इसकी छाया देखी जा रही है। सियासतदान इससे कांग्रेस और भाजपा को होने वाले घाटे-नफे का अनुमान लगाने में जुट गए हैं। 
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आनंद को अपने विचारों वाला बताकर चौंका दिया था बरागटा ने 
भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा ने कुछ साल पहले एक कार्यक्रम में आनंद शर्मा के साथ मंच साझा करते हुए विश्वविद्यालय के वक्त को याद किया था और उन्हें अपने विचारों का और अपने साथ खड़ा रहा बताकर सबको चौंका दिया था। एबीवीपी में रहे बरागटा के साथ आनंद शर्मा विश्वविद्यालय में केंद्रीय छात्र संघ में सदस्य चुनकर आए थे।

तब तक आनंद का रुझान एनएसयूआई की ओर ज्यादा नहीं था। इसके बाद एक राजनीतिक घटना आनंद को एनएसयूआई की सक्रिय राजनीति में लाई। वीरभद्र सिंह ने उन्हें प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष बनवाया। केंद्र में सोनिया और राहुल गांधी के नजदीकी होने पर आनंद का प्रदेश की राजनीति में खूब हस्तक्षेप रहा। बाद में वीरभद्र सिंह के निशाने पर भी रहे। आनंद शर्मा शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज के भी पुराने मित्र हैं। हाल ही मेें भारद्वाज उनकी माता की शोक सभा में भी पहुंचे थे। 

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