इसके बाद एनएसयूआई और बाद में युकां का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। राठौर ने कहा कि परंपरा रही है कि जो व्यक्ति राजनीति में जिस सीढ़ी से चढ़ते हैं, पिछली सीढ़ी तोड़ते हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
वह जिस सीढ़ी पर चढ़े हैं, हाथ पकड़कर दूसरे आदमी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। राठौर ने कहा कि उन्होंने टिकट के लिए कभी आवेदन नहीं किया। अगर चाहते तो पंद्रह-बीस साल पहले विधायक बन जाते।
राठौर ने कहा कि अब प्रदेश कार्यालय शिमला में प्रदेश कार्यकारिणी, जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों की बैठकें नहीं होंगी। बंद कमरे में एक-दूसरे की केवल तारीफ होती है और घर जाकर सभी सो जाते हैं।
उनके अध्यक्ष बनने के बाद 10 से 15 सालों तक घर में बैठे कार्यकर्ता भी अब पार्टी कार्यक्रमों में पहुंचने लगे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी कहा है कि पुरानी प्रथा को बंद कर दें। कोई बड़े नेता का करीबी ही क्यों न हो, तो मीडिया में गया उस पर कार्रवाई होगी।