नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित अन्य कांग्रेस विधायकों ने जरूर मोर्चा संभाला लेकिन परिणाम नहीं बदल सके। पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा और जीएस बाली भी मतदान से एकाएक पहले ही कांगड़ा पहुंचे। सुधीर का समर्थन नहीं मिलने का खुलासा कर धर्मशाला से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विजय इंद्र करण ने कुलदीप राठौर की परेशानी को और बढ़ा दिया है।
कांग्रेस प्रत्याशी के आरोपों ने पार्टी नेताओं की दूरियों को सार्वजनिक कर दिया है। अब इस मामले से कुलदीप राठौर कैसे निपटते हैं। यह देखने लायक होगा। उधर, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए कोई स्टार प्रचारक भी नहीं भेजा गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के आने की उम्मीद थी लेकिन वह भी हरियाणा में प्रचार कर लौट गए। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष को स्वयं ही दोनों विधानसभा क्षेत्रों में जूझना पड़ा।
संगठन में काम करने का लंबा अनुभव भी कुलदीप राठौर के काम नहीं आ सका। उधर, कुलदीप राठौर का कहना है कि पच्छाद में लोकसभा चुनाव के दौरान हार का अंतर करीब 17 हजार वोट थे। अब मजबूती से चुनाव लड़कर अंतर को काफी कम किया गया है। सत्ता का दुरुपयोग होने से भाजपा जीती है। धर्मशाला में प्रत्याशी को लेकर काफी संशय रहा। सुधीर शर्मा के चुनाव नहीं लड़ने से पार्टी को नुकसान हुआ।