भाजपा के मुख्यमंत्री पद के चेहरे प्रेम कुमार धूमल की हार की आड़ में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को भी संजीवनी मिल सकती है। सुक्खू अपनी कुर्सी पर फिलहाल बने रह सकते हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव तक उनके अध्यक्ष बने रहने के आसार हैं।
चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अब पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर नेताओं की दिलचस्पी भी घट गई है, जबकि चुनाव से पहले सुक्खू को हटाने और उनकी जगह पाने की मुहिम में कई नेता लगे थे। 2012 में कांग्रेस सरकार सत्ता में आई तो उस वक्त पार्टी अध्यक्ष वीरभद्र सिंह ही थे। वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने तो थोड़े समय बाद उन्होंने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद छोड़ दिया।
तब कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनने के लिए कई नेताओं ने बहुत कोशिश की, मगर इस पद को हासिल करने में सुक्खू कामयाब हुए। दिलचस्प यह रहा कि सुक्खू 2012 में हमीरपुर जिले की नादौन सीट से ही विधानसभा चुनाव हार गए थे। हारने के बावजूद सुक्खू को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया।
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा के इस गढ़ में धूमल मुख्यमंत्री का चेहरा होने के बावजूद खुद ही चुनाव हार गए। अब हमीरपुर जिले की पांच सीटों में से भाजपा केवल दो सीटें ही जीत पाई है। सुक्खू नादौन सीट से चुनाव जीत गए हैं।
बेशक हमीरपुर जिले की सुजानपुर सीट पर धूमल की हार के पीछे वीरभद्र सिंह की रणनीति और कांग्रेस विधायक बने राजेंद्र राणा की अपनी मेहनत ज्यादा रही है।
इसके बावजूद यह कहीं न कहीं सुक्खू के लिए लाभप्रद हो गया है। सुक्खू के हितैषी इसे राहुल गांधी के पास उनके पक्ष में भुनाएंगे। ऐसे में हो सकता है कि वर्ष 2019 तक सुक्खू अध्यक्ष पद पर बने ही रहें।