जयराम ठाकुर का परिवार सादगी की मिसाल है। छोटी बहन अनु ठाकुर आंगनबाड़ी वर्कर हैं तो बड़े भाई अनंत राम काष्ठकुणी शैली के निपुण कारीगर। जब भाई पहली दफा विधायक चुने गए थे तो बहन को आंगनबाड़ी वर्कर बने कुछ ही दिन हुए थे।
भाई विधायक से पंचायतीराज मंत्री और आज प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं, लेकिन आज भी बहन आंगनबाड़ी वर्कर ही हैं। बड़े भाई अनंतराम पिता स्व. जेठूराम से विरासत में मिली काष्ठकला की कारीगरी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
गरीबी का दौर देखकर छात्र राजनीति से संघ तक सफर आसान नहीं था। गरीबी के दौर में इस परिवार की बदौलत ही सफर तय किया।
राजनीति में कदम रखने पर जब वर्ष 1993 में हार मिली तो परिवार चट्टान की तरह साथ रहा। हालांकि, माता-पिता ने एक बार राजनीति में जाने से टोका भी, लेकिन जयराम के बुलंद हौसलों के आगे गरीबी ने भी घुटने टेक दिए।