निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि जिला स्तर पर संचालित शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कॉलेजों, पुस्तकालयों और एनसीसी कार्यालयों में कार्यरत पात्र कर्मचारियों की जानकारी भी शामिल की जाए। यदि किसी जिले में नियमितीकरण के लिए कोई पात्र कर्मचारी नहीं है तो उसकी शुन्य रिपोर्ट भी भेजनी होगी। जिला अधिकारियों को यह प्रमाणित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके जिले का कोई भी पात्र क्लर्क या जेओए आईटी नियमितीकरण की सूची से छूटा न हो।
निदेशालय ने पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए 12 प्रकार के दस्तावेज अनिवार्य किए हैं। इनमें नियुक्ति आदेश, भर्ती का माध्यम, पुनर्नियुक्ति या सेवा समाप्ति आदेश (यदि लागू हों), शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्र, हिमाचली बोनाफाइड प्रमाणपत्र, टाइप टेस्ट योग्यता, चरित्र प्रमाणपत्र, कार्य एवं आचरण प्रमाणपत्र, आरक्षण श्रेणी प्रमाणपत्र, दो वर्ष की निरंतर सेवा का प्रमाणपत्र और नवीनतम मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र शामिल हैं।
प्राथमिक शिक्षकों का क्रमिक अनशन 13वें दिन भी जारी
प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ का स्कूल शिक्षा निदेशालय शिमला के बाहर क्रमिक अनशन शुक्रवार को 13वें दिन भी जारी रहा। संघ ने कहा कि शिक्षकों की न्यायोचित मांगों को लेकर शुरू किया गया आंदोलन पूरे जोश, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है तथा मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। अनशन के 13वें दिन जिला किन्नौर इकाई के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इनमें जिला अध्यक्ष सुरेंद्र नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश, महासचिव संजय रापा, कोषाध्यक्ष श्रवण नेगी, महालेखाकार सुरजीत सिंह तथा पूह खंड के उपाध्यक्ष गोबिंद सिंह शामिल रहे। पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक वर्ग लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संघ नेताओं ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 11 जुलाई 2026 को बनखंडी से न्याय यात्रा से हुई थी, जो शिमला पहुंची। इसके बाद 26 जुलाई को चौड़ा मैदान शिमला में विशाल धरना आयोजित किया गया और वहीं से क्रमिक अनशन शुरू किया गया। शिक्षक संघ का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। संघ ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई है।