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हिमाचल: भ्रष्टाचार के मामले में सिविल सप्लाई कारपोरेशन के कर्मी को पांच साल कैद

Sat, 03 Jan 2026 11:32 AM IST
Krishan Singh प्रकाश ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर।

सार

 रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश किन्नौर सत्र न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में स्टेट सप्लाई कारपोरेशन के कर्मचारी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश किन्नौर सत्र न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में स्टेट सप्लाई कारपोरेशन के कर्मचारी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी ने तालुका केरोसिन डिपो काजा में पेट्रोल उत्पादों को क्रेडिट पर बेचने में गड़बड़ी की थी। अदालत ने मामले के सह आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी किया है। भ्रष्टाचार का यह मामला साल 2008-09 में सामने आया। मामले के अनुसार 2008 में तालुका केरोसिन डिपो काजा के फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान स्टॉक में अंतर पाया गया। कारपोरेशन के निर्देशों के विपरीत सरकारी विभागों को बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल और केरोसिन क्रेडिट आधार पर बेचा गया था।

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फिजिकल वेरिफिकेशन की यह रिपोर्ट कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक को सौंपी। उन्होंने तालुका केरोसिन काजा के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति की रिपोर्ट में कुल 44,22,033.74 रुपये का गबन बताया गया। आरोपी कर्मचारी भगत राम और ताशी तंदुप से बाद में कुल 3,16,438 रुपये रिकवर किए गए। मामले की शिकायत अप्रैल 2010 को स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन शिमला के क्षेत्रीय प्रबंधक ने पुलिस थाना काजा में दी थी। पुलिस ने मामले की जांच कर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की। अदालत ने आरोपी को पांच साल का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर दोषी को छह महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा। 
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