राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रदेश पुलिस बल के कर्मियों से मैत्रीपूर्ण व्यवहार और उत्तरदायित्व की भावना से काम करने पर बल दिया है। कहा कि प्रभावित व्यक्ति में यह विश्वास बनना चाहिए कि उसकी समस्या का समाधान होगा।
पुलिस पर जनता का पूर्ण विश्वास बनाए रखने के लिए उन्हें अधिक व्यावहारिक होकर व्यवस्थित समाज की दिशा में योगदान देना चाहिए। राज्यपाल ने यह बात वीरवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में हिमाचल प्रदेश पुलिस के प्रथम स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में कानून व्यवस्था सर्वोपरि है। ऐसे में पुलिस का कार्य और महत्वपूर्ण हो जाता है। वह चाहे खेल का क्षेत्र हो या आंतरिक व्यवस्था, पुलिस ने प्रतिभा का परिचय दिया है।
कहा कि यह मानवीय कमजोरी है कि बुराई की ओर व्यक्ति जल्दी आकर्षित होता है और यही कमजोरियां समाज को व्यवस्थित करने में बड़ी बाधा है। इसलिए पुलिस का दायित्व है कि वे ऐसे सिद्धांतों को लागू करे जो समाज को व्यवस्थित करते हैं ताकि समाज का हर व्यक्ति शांति से रह सके और सबको न्याय मिल सके।
नैतिकता में कमी और नशाखोरी पर चिंता
राज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि आज हर क्षेत्र में बेशक विकास हुआ है लेकिन समाज में नैतिकता में कमी आई है। पुलिस में भी कुछ समस्याएं हैं। लेकिन उम्मीद जताई कि पुलिस उनसे उबरकर फिर से नया गौरवमयी इतिहास खड़ा करेगी।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल में वर्षभर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं जो सबसे पहले पुलिस के संपर्क में आते हैं। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि उसका व्यवहार ही राज्य की छवि को बनाता है।
राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृति पर चिंता व्यक्त की। कहा कि नशाखोरी को रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए ताकि राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी व उपयोग पर पूर्ण रोक लग सके।
ये है हिमाचल पुलिस का इतिहास
वर्ष 1948 में हिमाचल पुलिस बल का एक छोटी इकाई के रूप में गठन हुआ
वर्ष 1948-49 में हिमाचल पुलिस बल का कार्यभार पुलिस महानिरीक्षक पद के अधिकारी को सौंपा गया
वर्ष 1953 में हिमाचल पुलिस के लिए पृथक पुलिस महानिरीक्षक की नियुक्ति की गई, 3 अप्रैल 1987 तक बल का नेतृत्व इसी पद के अधिकारी के पास रहा
4 अप्रैल 1987 से हिमाचल प्रदेश पुलिस का नेतृत्व पुलिस महानिदेशक पद के अधिकारी को सौंपा गया
वर्ष 1948 से हिमाचल में आरंभ हुई पुलिस व्यवस्था ने अपने लंबे सफर में कई आयाम स्थापित किए