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एक क्लिक में पढ़िए कैबिनेट के अहम फैसले

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हिमाचल में अब आठ लाख तक के सालाना कारोबारियों पर भी वैट लगेगा। हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। अब सूबे के विधायक और सांसद अपनी गाडि़यों में फ्लैशर्स के साथ एंबर लाइट का इस्तेमाल कर सकेंगे। नई परिवहन नीति को भी मंजूरी दे दी है।
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इसके तहत अब प्रदेश में सड़क सुरक्षा को शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। राज्य में अलग-अलग तरह से चल रहे वाहन करों का युक्तिकरण होगा। रूट सेलेक्शन में भी बदलाव किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला हुआ कि हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्द्धित कर नियम 2005 के नियमों में संशोधन किया जाएगा। जहां पहले वैट के दायरे में 25 लाख रुपये का सालाना कारोबार वाले व्यापारी आते थे, वहीं अब यह सीमा घटाकर आठ लाख रुपये कर दी गई है।
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विक्रेताओं को देना होगा सवा प्रतिशत कर

जिन विक्रेताओं की सालाना बिक्री 8 लाख से 25 लाख रुपये के बीच है, उन्हें अब सालाना लगभग सवा प्रतिशत कर देना होगा।। यह प्रथम अप्रैल 2015 से वार्षिक बिक्री पर देना होगा। बैठक में लोकपाल और महाधिवक्ता को वाहन में फ्लैशर के साथ लालबत्ती के प्रयोग के लिए स्वीकृति प्रदान की गई।

सभी सांसदों, मुख्य संसदीय सचिवों, सभी विधायकों, महापौर, सुपर-टाइम स्केल प्राप्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के सभी अधिकारियों, सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, सभी उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को फ्लैशर के साथ एंबर लाइट के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है।

यह भी निर्णय लिया गया है कि चालान करने की शक्ति रखने वाले परिवहन विभाग के अधिकारी और सभी आबकारी एवं कराधान अधिकारी जिला में फ्लैशर के बिना नीले रंग की बत्ती प्रयोग कर सकेंगे।

यहां खोला जाएगा आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र

बैठक में कांगड़ा जिला की ग्राम पंचायत बीजापुर के तहत उत्तरपुर गांव और चंबा जिला की तहसील सलूणी की ग्राम पंचायत स्नोह के गांव पधन में पर्याप्त स्टाफ सहित नए आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया। यह फैसला मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप है। ऊना जिला के हरोली में सात सदस्यीय स्टाफ के साथ उप-मण्डलीय पुलिस अधिकारी कार्यालय खोलने की स्वीकृति दी गई है।

कुल्लू जिला के बंजार के लारजी में फायर पोस्ट खोलने की भी मंजूरी प्रदान की गई है। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप शिमला जिले के ठियोग के बलग एकादशी मेले को राज्य स्तरीय दर्जा प्रदान करने का निर्णय लिया। मंत्रिमण्डल ने मंडल जिला के नेर चैक में नगर पंचायत के गठन का निर्णय लिया।

कांगड़ा जिला के बैजनाथ और पपरोला में भी नगर पंचायतों का गठन करने की स्वीकृति प्रदान की। शिमला से अधीक्षण अभियंता (पी एंड आई) का कार्यालय आवश्यक स्टाफ सहित कांगड़ा जिला के फतेहपुर स्थित इंजीनियर-इन-चीफ (परियोजना) को स्थानांतरित करने का फैसला किया है।

इन विधेयकों को सदन में लाने को मंजूरी

मंत्रिमंडल की बैठक में हिमाचल प्रदेश विशेष अदालतें (संपति की कुर्की एवं अधिकरण) बिल 2011 को वापस लेने और राष्ट्रपति की सहमति के लिए भारत सरकार को पुन: भेजने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने आगामी विधानसभा सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत वितरण प्रबंधन दायित्व बिल 2014 प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अध्यादेश 1970 में संशोधन के लिए बिल के रूप में विधानसभा में रखने का निर्णय लिया है। विधानसभा में हिमाचल प्रदेश कोर्ट फीस (संशोधन) बिल, 2014 को प्रस्तुत करने का भी फैसला लिया है।

जनजातीय क्षेत्रों में शुरू होगी टेलीमेडिसिन सेवा
शिमला। मंत्रिमंडल ने प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में चिकित्सा विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से लाहौल स्पीति जिला के जिला अस्पताल केलंग तथा काजा में मैगा टेली-मेडिसिन पायलट प्रोजेक्ट को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया गया।

सरकार ने खोला नौकरी का पिटारा

सरकार ने प्रदेश के विभिन्न विभागों में 398 पदों को भरने जा फैसला लिया है। इसमें सर्वाधिक 220 पद वन विभाग में अनुबंध आधार पर भरे जाने है। खाद्य आपूर्ति विभाग में डाटा एंट्री आपरेटर के 40 पदों को आउट सोर्स के तहत भरने को मंजूरी दी है। युवा सेवाएं एवं खेल विभाग में कनिष्ठ प्रशिक्षकों के 50 पद सृजित करने का निर्णय लिया। सरकार ने पुलिस विभाग में महिला सब- इंस्पेक्टर के 16 पद भरने को मंजूरी दी।

कार्यकारी अधिकारियों, सचिवों को मिलेगा संशोधित वेतन
नगर परिषदों और नगर पंचायतों के कार्यकारी अधिकारियों एवं सचिवों को भविष्य में उच्च वेतन संरचना देने का फैसला किया गया है। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत पंचायत समितियों में कार्यरत कनिष्ठ लेखापालों को तीन वर्षाें का सेवाकाल पूरा करने के बाद वेतनमान प्रदान करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में आयुर्वेद विभाग में संस्कृत प्रवक्ताओं के लिए नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाने के लिए मंजूरी प्रदान की गई।

टीसीपी विधेयक में संशोधन को मंजूरी

हिमाचल सरकार ने अवैध भवनों को वैध कराने के लिए टीसीपी विधेयक में संशोधन को मंजूरी दे दी है। संशोधित विधेयक के प्रारूप में पूरा पैटर्न ही बदल दिया गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में संशोधित विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई। संशोधित विधेयक के प्रारूप में टीसीपी एरिया में घर नियमित कराने की फीस 70 फीसदी, जबकि नगर निगम एरिया में 60 फीसदी कम दी है।

प्रारूप के अनुसार टीसीपी दायरे में घर की ग्राउंड फ्लोर नियमित कराने के लिए 400 रुपये प्रति वर्गमीटर और अन्य मंजिलें नियमित कराने के लिए 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से राशि वसूली जाएगी। नगर निगम शिमला के एरिया में ग्राउंड फ्लोर 800 रुपये और अन्य मंजिलें 400 रुपये प्रति वर्गमीटर शुल्क की दर के हिसाब से नियमित होंगे।

छह मंजिल तक के भवन होंगे नियमित

प्रदेश में 70 फीसदी तक अवैध भवन नियमित होंगे। मंत्रिमंडल की बैठक में 6 मंजिल तक के भवनों को नियमित करने का फैसला लिया गया है। इसमें दो पार्किगिं दी जाएंगी। कैबिनेट में इन पार्किगिं का रेट भी तय किया है जिसे कम रखा गया है।

ग्रीन, कोर और हेरिटेज एरिया में निर्माण पर रोक
सरकार ने ग्रीन, कोर और हेरिटेज एरिया में भवन निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है। पहले से बने अवैध भवन भी नियमित नहीं होंगे। नगर निगम क्षेत्र में ही इन तीनों एरिया में सैकड़ों प्लॉट और अवैध भवन बने हैं जिन्हें सरकार ने कोई राहत नहीं दी है।

कई भवन मालिकों को झटका
मंत्रिमंडल ने पुरानी रिटेंशन पॉलिसी के तहत नियमित करवाए भवनों के मालिकों को कोई राहत नहीं दी है। ऐसे कई भवन मालिकों ने पुरानी पॉलिसी के तहत भवन नियमित करवाने के बाद भी निर्माण किया है। संशोधित एक्ट में इस अवैध निर्माण को नियमित करने का प्रावधान नहीं किया गया है।

मनाली, डलहौजी और धर्मशाला के लोगों को राहत

मंत्रिमंडल ने मनाली, डलहौजी और धर्मशाला के लोगों को भवन नियमित कराने में राहत दी है। यहां कोर, ग्रीन और हेरिटेज एरिया नहीं है। ये लोग नियमों के मुताबिक निर्माण और भवनों को नियमित करा सकेंगे।

पहले ये थीं घर नियमित कराने की दरें
- 10 से 20 फीसदी तक अनाधिकृत- 1000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से
- 20 से 40 फीसदी तक अनाधिकृत- 2000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से
- 40 से 60 फीसदी तक अनाधिकृत- 3000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से
- 60 से 70 फीसदी तक अनाधिकृत- 4000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से

वाहन करों का युक्तिकरण करेगी सरकार

कांग्रेस सरकार राज्य में अलग-अलग तरह से चल रहे वाहन करों का युक्तिकरण करेगी। वाहनों के लिए उपयुक्त कर और गैर प्रोत्साहन करों पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन कनेक्टिविटी की समीक्षा होगी। इसे अधिक बेहतर बनाया जाएगा। चालकों को आधुनिक तौर-तरीकों और तकनीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा। रूट सेलेक्शन में भी बदलाव किए जाएंगे।

मंत्रिमंडल से मंजूर नई परिवहन नीति में परिवहन क्षेत्र के विस्तार में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें विभिन्न केंद्रीय और राज्य नियमों के प्रावधानों को आवश्यक रूप से कार्यान्वयन के अलावा परिवहन विभाग की भूमिका को पुन: परिभाषित किया गया है। परिवहन नीति में यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करने के अलावा कृषि और गैर कृषि उत्पादों की विपणन व्यवस्था के लिए अत्याधुनिक मालभाड़ा वाहनों को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जाएगा।

वाहनों के लिए उपयुक्त कर तथा गैर कर प्रोत्साहनों का प्रावधान किया जाएगा। सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिसे शैक्षणिक गतिविधियों का हिस्सा भी बनाया जाएगा। इसके यात्रा सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा प्राप्त होगी।

नींबू प्रजाति के फलों की 50 केंद्रों में होगी सरकारी खरीद

हिमाचल में मंडी मध्यस्थता योजना के तहत नींबू प्रजाति के फलों की खरीद के लिए 50 खरीद केंद्र खोले जाएंगे। मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्ष 2014-15 के दौरान नींबू प्रजाति के फलों जैसे किन्नू, मालटा, संतरा इत्यादि की सरकारी खरीद के लिए मंडी मध्यस्थता योजना कार्यान्वित की जाएगी।

योजना के तहत 500 मीट्रिक टन किन्नू, मालटा और संतरा और 100 मीट्रिक टन गलगल बी-ग्रेड के लिए 6 रुपये 50 पैसे, सी ग्रेड के लिए 6 रुपये और गलगल को 5 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा। इसके अलावा किन्नू, मालटा और संतरा के लिए 2.65 रुपये प्रति किलो की दर से जबकि गलगल के लिए एक रुपये हैंडलिंग चार्जिज दिए जाएंगे। यह योजना 20 नवंबर, 2014 से 14 फरवरी, 2015 तक प्रभावी रहेगी।

कैसे देंगे 334 करोड़ नहीं हो पाया फैसला

प्रदेश सरकार पर एसजेबीएनएल की 334 करोड़ रुपये की देनदारी है। ये पैसा एसजेबीएनएल से खरीदी गई बिजली का बकाया है। केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने बकाया राशि देने का फैसला सुनवाया है। अगर इस राशि को 6 महीने के भीतर नहीं दिया गया तो इस पर पनेल्टी लगेगी। मंत्रिमंडल की बैठक में इस मामले पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रदेश सरकार घाटे में चल रही है। राशि ज्यादा होने पर ये राशि सरकार के बस से परे हैं। फिलहाल इस मामले पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

साईं फाउंडेशन को दिए तीन प्रोजेक्ट
साईं इंजीनियरिंग फाउंडेशन को बीओटी आधार पर लोअर सुमेज (5 मेगावाट), तौहुक (4.5 मेगावाट) तथा करेड़ी (5 मेगावाट) तीन जल विद्युत परियोजनाओं को आबंटित करने की स्वीकृति प्रदान की। चार सालों के भीतर इन परियोजनाओं को पूरा करने की शर्त रखी गई है। यह भी निर्णय लिया गया कि साईं इंजीनियरिंग फाउंडेशन 6.75 प्रतिशत नि:शुल्क ऊर्जा रॉयल्टी देगा।

ऊर्जा बिक्री से राज्य को प्राप्त होने वाले राजस्व के दृष्टिगत वर्तमान प्रबंधों को एक वर्ष के लिए विस्तार देने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा मंत्रिमंडल ने टाटा पावर ट्रेेडिंग कारपोरेशन के साथ बिजली विक्रय का करार एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है।
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राष्ट्रीय स्तर की बनेगी टेक्निकल यूनिवर्सिटी

हिमाचल प्रदेश की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए प्रदेश सरकार ने नया कानून लाने का फैसला लिया है। अब प्रदेश में बनने वाली टेक्निकल यूनिवर्सिटीज राष्ट्रीय स्तर की होगी। जवाहर लाल यूनिवर्सिटी की तर्ज पर प्रदेश में ही स्टूडेंट्स को पढ़ाई मिलेगी।

इसके लिए सरकार वर्तमान हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 को निरस्त कर आगामी विधानसभा सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय बिल के रूप में नया कानून लाने को मंजूरी प्रदान की गई। तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली ने कहा कि पुराने अधिनियम 2010 की सभी कमियों को दूर कर दिया गया है।
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