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कैबिनेट बैठक: रिटायर पटवारी-कानूनगो करते रहेंगे काम, रघुनाथ मंदिर अधिग्रहण रद्द

Fri, 05 Jan 2018 01:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में अनुबंध आधार पर नियुक्त किए गए सेवानिवृत पटवारियों तथा कानूनगो की सेवाओं को नए पटवारियों का प्रशिक्षण पूरा होने तथा उनकी नियुक्ति होने तक जारी रखने का निर्णय लिया गया ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की 1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च, 2016 तक की 45वीं वार्षिक रिपोर्ट को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत करने को मंजूरी प्रदान की। बैठक में हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवाओं (श्रेणी-1) राजपत्रित के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियमित आधार पर भरने को मंजूरी प्रदान की गई।

सरकारी सेवाएं दे रहे पूर्व सैनिकों का वित्तीय लाभ बहाल

सरकारी सेवाएं दे रहे कई पूर्व सैनिकों का वित्तीय लाभ बहाल कर दिया गया है। वीरवार को हुई सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में पूर्व वीरभद्र सरकार के एक और फैसले को पलटते हुए यह तय किया गया कि पूर्व सैनिकों को सेना में दी गई सेवाओं के आधार पर पे-फिक्सेशन किया जाएगा।

पूर्व वीरभद्र मंत्रिमंडल ने 5 अगस्त 2017 को निर्णय लिया था कि न तो पूर्व सैनिक कोटे के कर्मचारियों को सैन्य सेवाओं की गणना करते हुए वरिष्ठता लाभ दिया जाएगा और न ही उन्हें पे फिक्सेशन का फायदा दिया जाएगा। इसके लिए मंत्रिमंडल ने डिमोबिलाइज्ड सशस्त्र बल (हिमाचल राज्य में गैर तकनीकी सेवा में रिक्तियों का आरक्षण) नियम, 1972 के नियम -5 (1) और पूर्व सैनिक (हिमाचल

राज्य में तकनीकी सेवा में रिक्तियों का आरक्षण) नियम 1985 के नियम-5(1) को हटाने के संबंध में 5 अगस्त, 2017 को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय की समीक्षा की तथा पूर्व सैनिकों को सिविल रोजगार में वेतन निर्धारण के लाभ को बहाल करने का निर्णय लिया। यह निर्णय उन्हें वित्तीय लाभों के लिए हकदार बनाएगा।

रघुनाथ मंदिर अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द

मंत्रिमंल ने हिंदु सार्वजनिक धार्मिक संस्थान एवं धर्मार्थ सावधि अधिनियम, 1984 की अनुसूचि-1 से कुल्लू जिला के रघुनाथ मंदिर सुल्तानपुर को बाहर रखने को मंजूरी प्रदान की। अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ मंदिर अधिग्रहण की प्रक्रिया को प्रदेश सरकार ने रद्द कर दिया है। इसकी सूचना पाकर देवभूमि कुल्लू के देवसमाज में खुशी का माहौल है। पूरा देव समाज गदगद हो गया है और प्रदेश सरकार का आभार जताया है। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने इसे न्याय की जीत बताया है। 

उल्लेखनीय है कि जुलाई 2016 को प्रदेश सरकार ने भगवान रघुनाथ के मंदिर को ट्रस्ट बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने अधिग्रहण को लेकर स्टे लगाया। बाद में पूर्व मंत्री एवं महेश्वर सिंह के अनुज कर्ण सिंह भी अदालत पहुंचे और मामले को लेकर पार्टी बने लेकिन 31 दिसंबर को याचिका के रद्द होने के बाद प्रदेश सरकार के आदेश फिर से लागू हो गया था।

31 अगस्त 2017 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा महेश्वर सिंह की रघुनाथ मंदिर के अधिग्रहण के खिलाफ दी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद 13 सितंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह की सरकार के अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिग्रहण पर रोक लगा दी है।

यह रोक तब तक लगी रहनी थी जब तक सुप्रीम कोर्ट से मामले को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं आ जाता। इस संबंध में भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह  के अनुसार प्रदेश सरकार ने उन्हें न्याय दिया है जिसके वह सदैव सरकार के आभारी रहेंगे। यह पूरे देव समाज की जीत है। वहीं जिला देवी-देवता कारदार संघ के जिला अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

लोन की गारंटी देने को सरकार तैयार

हिमाचल प्रदेश सरकार
हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) की ओर से हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हुडको) से लिए 36 करोड़ की लोन गारंटी देने के लिए प्रदेश सरकार तैयार हो गई है। वीरवार को मंत्रिमंडल की बैठक में 28 फरवरी, 2021 तक लोन गारंटी बढ़ाने को मंजूरी मिल गई है।

गौरतलब है कि हिमुडा ने जाठिया देवी में कालोनियों बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। जमीन का पैसा देने के लिए हुडको से लोन लिया था, जिसकी गारंटी की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2017 को खत्म हो गई थी। ऐसे में इस मामले को कैबिनेट में लाया गया था।

डिमांड ऑफ सर्वे के तहत हिमुडा ने लोगों से प्लाट और फ्लैट के लिए आवेदन मांगे थे। बाकायदा इन लोगों से 5000 रुपये सिक्योरिटी ली गई। लेकिन इन्हें फ्लैट उपलब्ध नहीं कराए गए। इन्हें बसाने के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने जाठिया देवी में करीब 300 बीघा जमीन खरीदी थी। 

ठियोग-कोटखाई-खड़ापत्थर सड़क होगी चौड़ी
मंत्रिमंडल ने खड़ापत्थर-रोहडू़ सड़क को चौड़ा करने के अलावा 29.310 करोड़ रुपये की लागत से ठियोग-कोटखाई-खड़ापत्थर सड़क को चौड़ा करने का फैसला लिया है। इसके अलावा इसके विस्तार के बचे कार्य को पूरा करने को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। 

एम्स स्थापित करने की स्वीकृति देने पर जताया आभार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बिलासपुर में एम्स के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत करने पर जयराम कैबिनेट ने आभार जताया है। 

वीरवार को हुई कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्रिमंडल के सदस्यों ने प्रधानमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का आभार व्यक्त किया। वहीं सांसद अनुराग ठाकुर ने भी ट्वीट कर प्रधानमंत्री का आभार जताया।

पंजाब, हरियाणा के हिस्से की बिजली बेचकर अपना पैसा पूरा करेगा हिमाचल

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के तहत आने वाले बिजली प्रोजेक्टों में पंजाब और हरियाणा के शेयर को बेचकर हिमाचल सरकार अपने बकाये की वसूली करेगी। वीरवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में शिमला सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की फैसला लिया गया कि पंजाब, हरियाणा के हिस्से की बिजली बेचकर 3266 करोड़ रुपये कमाए जाएंगे।

इस फैसले के तहत अब दस साल के भीतर हिमाचल 13066 मिलियन यूनिट बिजली बेचकर अपना एरियर वसूलेगा। इस नई व्यवस्था से हिमाचल को प्रति वर्ष 200 से 250 करोड़ रुपये की आमदनी होगी। मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय के अंतर ऊर्जा रिटर्न

मामले में जारी 27 सितंबर 2011 के आदेशों की अनुपालना में बीबीएमबी परियोजनाओं में बकायों के निपटारे के लिए मंजूरी प्रदान की। इस फैसले के तहत 13066 मिलियन यूनिट ऊर्जा मात्रा से राज्य को औसतन 2.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से 3266 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होगी। 

पंजाब ने हिमाचल सरकार को दिया था ऑफर

मंत्रिमंडल ने 10 से 12 वर्ष की अवधि के भीतर पूरी अंतर ऊर्जा की वापसी के लिए पंजाब तथा हरियाणा के साथ समझौता वार्ता के लिए मंजूरी प्रदान की। मंत्रिमंडल ने भारत सरकार द्वारा अपने शपथ पत्र में की गई गणना के अनुरूप ऊर्जा की वापसी की अवधि के दौरान समान वार्षिक किश्तों में 111.53 करोड़ रुपये की देनदारी की अदायगी के लिए भी समझौता वार्ता पर सहमति जताई।

यदि पंजाब और हरियाणा राज्य ब्याज सहित भुगतान की बात करते हैं तो हिमाचल प्रदेश 6 प्रतिशत प्रीमियम के साथ ऊर्जा की वापसी की बात करेगा और 13066 मिलियन यूनिट अंतर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त देनदारी नहीं होगी।

मंत्रिमंडल ने पहली अक्तूबर से 31 मार्च के दौरान धान की फसल के दौरान पंजाब तथा हरियाणा में बिजली की कम आवश्यकता तथा सार्वजनिक हित में सर्दियों के महीनों के दौरान हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकताओं के चलते पंजाब तथा हरियाणा से ऊर्जा वापसी के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।

2900 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने में असमर्थ पंजाब ने हिमाचल सरकार को ऑफर दिया था कि इस बकाये की वसूली अगर हिमाचल चाहे तो अगले 20 साल तक बीबीएमबी के प्रोजेक्टों में पंजाब के हिस्से की बिजली बेचकर कर सकता है। हिमाचल सरकार ने पंजाब के इस आफर को मंजूर करते हुए 20 साल की जगह 10 साल में वसूली करने को मंजूरी दी है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई थी हिमाचल की जीत

हिमाचल सरकार ने अपना हिस्सा लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। सुप्रीमकोर्ट से फैसला हिमाचल के पक्ष में आया। उस समय पंजाब पर बकाया 4200 बनता था लेकिन दोनों राज्यों के बीच सहमति बनीं कि हिमाचल को पंजाब 2900 करोड़ देगा।

एनएच किनारे पेड़ काटने को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में पेड़ों के कटान पर लगाए गए प्रतिबंध में छूट देने का निर्णय लिया गया है।

यह छूट भारतीय राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण द्वारा कंडाघाट से कैथलीघाट तक राष्ट्रीय उच्च मार्ग 22 पर चार लेन के निर्माण के लिए हस्तांतरित व अधिग्रहण की गई निजी भूमि से कुछ पेड़ों व पौधों को काटने के लिए दी गई है।

अभी तक मंजूरी न मिलने की वजह से पेड़ काटने का काम लटका था जिसकी वजह से प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा होने की संभावना कम हो गई थी।

पूर्व सैनिक कोटे से नौकरी लेने वाले कर्मचारियों को 20 हजार तक फायदा

पूर्व सैनिक - फोटो : File Photo
हिमाचल प्रदेश में पूर्व सैनिक कोटे से नौकरी लेने वाले सरकारी कर्मचारियों को 20 हजार रुपये तक फायदा होगा। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक  ने पिछली वीरभद्र सरकार के एक और फैसले को पलटते हुए ये तय किया है कि हिमाचल में सरकारी सेवाएं दे रहे पूर्व सैनिकों के पे फिक्सेशन से जुडे़ वित्तीय लाभ बहाल किए जाएंगे।

प्रदेश में ये लाभ हजारों कर्मचारियों को मिलेगा।  मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया है कि पूर्व सैनिकों का सिविल नौकरी में आने पर सेना में दी गई सेवाओं के आधार पर ही पे फि क्सेशन किया जाएगा। पूर्व सरकार के तत्कालीन मंत्रिमंडल ने पांच अगस्त 2017 को इस लाभ को नहीं देने को लेकर जो फैसला लिया था, उसकी वीरवार की कैबिनेट बैठक में समीक्षा की गई।

इससे पहले पूर्व सैनिक कोटे के कर्मचारियों को सैन्य सेवाओं की गणना करते हुए वरिष्ठता और पे फिक्सेशन का फायदा दिया जाता था। अब वरिष्ठता लाभ तो जारी नहीं रहेगा, जबकि पे फिक्सेशन पूर्ववत की जाती रहेगी। अब अगर किसी कर्मचारी ने सेना में 20 साल सेवाएं दी हैं तो उसकी पे फिक्सेशन इन सैन्य सेवा के 20 सालों को आधार बनाकर की जाएगी।

दरअसल पूर्व सरकार ने सामान्य श्रेणी कर्मचारियों के सुप्रीम कोर्ट तक जाने और वहां से फैसला आने के बाद ही ऐसा करने का फैसला लिया था। इसके लिए जयराम मंत्रिमंडल ने डिमोबिलाइज्ड सशस्त्र बल (हिमाचल राज्य में गैर तकनीकी सेवा में रिक्तियों का आरक्षण) नियम 1972 के नियम 5 (1) और पूर्व सैनिक (हिमाचल राज्य में तकनीकी सेवा में रिक्तियों का आरक्षण) नियम 1985 के नियम 5(1) को हटाने के संबंध में 5 अगस्त 2017 के मंत्रिमंडल की बैठक के फैसले की समीक्षा की।

अगली कैबिनेट में होगा कैबिनेट उपसमिति बनाने पर निर्णय

वीरभद्र सरकार के 1 अप्रैल 2017 के बाद दो सौ से अधिक फैसलों को पलटने के लिए सरकार मंत्रिमंडल की उपसमिति गठित करने पर अब अगली कैबिनेट बैठक में निर्णय होगा। वीरवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पर निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल अब अगली बैठक में इस पर निर्णय ले सकता है।

दरअसल, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीरभद्र सरकार के अंतिम छह महीनों के फैसलों का रिव्यू करने का एलान किया था। इसके बाद मंत्रिमंडल ने सभी विभागों से पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों को रिव्यू करने का एजेंडा तैयार करने को कहा था। लगभग चार हजार पदों पर भर्तियों के निर्णय सहित कई नीतिगत फैसले वीरभद्र सरकार ने लिए थे। 

सभी पर पुनर्विचार करने के लिए सरकार को खासा समय लग सकता था। ऐसे में सरकार इस बार पर विचार कर रही है कि एक सब कमेटी बनाकर उससे मुद्दे चयनित कराने के बाद कार्रवाई की जाए। अब कुछ फैसले तो कैबिनेट खुद ही लेगी, लेकिन नीतिगत फैसलों को पलटने के लिए आने वाले समय में मंत्रिमंडल उपसमिति का गठन हो सकता है।

सैकड़ों शिक्षकों का एक हजार रुपये तक मानदेय बढ़ा

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पीटीए पर नियुक्त करीब 600 शिक्षकों के मानदेय में सरकार ने 800 रुपये से एक हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इन शिक्षकों को अनुबंध शिक्षकों के बराबर मानदेय देने के लिए सरकार ने 12.5 करोड़ की ग्रांट जारी की है।

मानदेय में बढ़ोतरी के अलावा प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के तहत आने वाले इन टीजीटी और सीएंडवी को पहली जनवरी 2015 से दिसंबर 2017 तक का एरियर भी मिलेगा।

कांग्रेस सरकार ने बीते सितंबर महीने में हुई कैबिनेट बैठक में अनुबंध पर आने से छूट चुके 1368 लेफ्ट आउट पीटीए शिक्षकों को अनुबंध शिक्षकों के बराबर वित्तीय लाभ देने का फैसला लिया था। जनवरी 2015 से इन्हें वित्तीय लाभ देने का फैसला भी लिया गया था।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही वित्तीय लाभ देने के आदेश जारी कर दिए थे लेकिन प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ग्रांट जारी नहीं होने के चलते वित्तीय लाभ देने से छूट गया था। अब वित्त महकमे ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की मांग पर वित्तीय लाभ प्राप्त करने से छूट चुके करीब 600 लेफ्ट आउट पीटीए की मानदेय बढ़ोतरी और एरियर देने के लिए 12.5 करोड़ की ग्रांट जारी कर दी है।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के मुताबिक टीजीटी और सीएंडवी के मानदेय में प्रतिमाह 800 से एक हजार रुपये की बढ़ोतरी होगी। इन शिक्षकों को अनुबंध शिक्षकों से दस फीसदी कम मानदेय मिलता था।

कांग्रेस सरकार ने कानूनी पेच होने के चलते लेफ्ट आउट पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाने से हाथ खड़े कर दिए थे लेकिन शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अनुबंध शिक्षकों के बराबर वित्तीय लाभ देने का बड़ा फैसला लिया था।
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हिमाचल में सर्दियों में अब नहीं लगेंगे पावर कट

बीबीएमबी के पावर प्रोजेक्टों में पंजाब और हरियाणा के शेयर की बिजली बेचने से हिमाचल की आय में जहां करोड़ों रुपये का इजाफा होगा वहीं सर्दियों के मौसम में लगने वाले पावर कट से भी निजात मिल जाएगी। सर्दियां शुरू होते ही प्रदेश में नवंबर से लेकर मार्च महीने तक बिजली उत्पादन घट जाता है।

ठंड बढ़ते ही प्रदेश में महज 30 लाख यूनिट बिजली उत्पादन हो पाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश को हर साल 260 लाख यूनिट की खरीद करनी पड़ती है। पड़ोसी राज्यों से बैंकिंग पर बिजली सप्लाई लेने के बावजूद प्रदेश के लोगों को कई बार पावर कट का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब उम्मीद जगी है कि हिमाचल को पंजाब, हरियाणा से सप्लाई शुरू होते ही पावर कट की स्थिति पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के तहत अपने हिस्से की वसूली के लिए जयराम सरकार द्वारा पंजाब सरकार के ऑफर को मंजूरी देने से अब हिमाचल में सर्दियां उधार की बिजली से भी नहीं कटेंगी। हर साल हिमाचल को दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बैंकिंग पर बिजली लेनी पड़ती है।

इसके अलावा केंद्रीय शेयर और सरकार के अपने हिस्से से हिमाचल में बिजली की मांग को पूरा किया जाता है। सर्दियों में पड़ोसी राज्यों से बैंकिंग पर ली जाने वाली इस बिजली को गर्मियों में लौटाना पड़ता है। इस बैंकिंग का खामियाजा प्रदेश के उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है।

पड़ोसी राज्यों से किए गए बैंकिंग के समझौते को निभाने के लिए बिजली बोर्ड को प्रदेश में पावर कट लगाने पड़ते हैं। ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि हिमाचल के पास सरप्लस बिजली होने से पावर कट की समस्या पूरी तरह से दूर हो जाएगी। प्रदेश को सर्दियों के मौसम में भी पड़ोसी राज्यों से अधिक बिजली नहीं लेनी पड़ेगी।
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