मोदी, शाह, नड्डा और जयराम ठाकुर से उनकी बारंबार होती मुलाकातों को इससे जोड़कर देखा गया। मगर पिछले कई दिनों से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए तमाम नामों की चर्चा के बीच लोहड़ी-मकर संक्रांति पर डॉ. बिंदल का नाम अचानक सामने आ गया।
लोहड़ी के दिन जयराम-बिंदल की अलाव के ताप में हंसी-ठिठोली इस बात का संकेत देती रही कि दोनों के बीच कुछ पक चुका है। बिंदल के इस मनोनयन के पीछे नड्डा और जयराम की हामी तो है ही। बताया जा रहा है कि धूमल-अनुराग ने भी बिंदल का विरोध नहीं किया है। शांता कुमार तो इस मामले में तटस्थ बताए जाते हैं।
नए क्षेत्र नाहन में भी दिग्गजों को हराकर चर्चित हुए थे बिंदल
सवा दशक पहले डॉ. बिंदल का तत्कालीन निर्वाचन क्षेत्र सोलन आरक्षित हो गया था तो उन्होंने नाहन को नया हलका चुना। नई जगह भी उन्होंने एक सिंटिंग एमएलए, एक पूर्व मंत्री और एक पूर्व विधायक को हराकर चुनाव जीता था। इससे चुनावी प्रबंधन के लिए डॉ. बिंदल चर्चा में आए थे। उनका प्रबंधन बाद में भाजपा ने कई मौकों पर आजमाया जो अचूक रहा। अब इसकी आजमाइश मिशन रिपीट में होगी।