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Suresh Kashyap: जो जमानत पर हैं, वह कह रहे दिल्ली घेरो

Mon, 13 Jun 2022 08:51 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कश्यप ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी की यंग इंडियन कंपनी का डोटेक्स मर्चेंडाइज के साथ क्या संबंध है, जो इस गुप्त लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए कोलकाता स्थित हवाला कंपनी है?
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि जो लोग जमानत पर हैं, वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं से दिल्ली को घेरने और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए जांच एजेंसियों पर दबाव बनाने को कह रहे हैं। भाजपा भ्रष्टाचारियों को जवाबदेही से बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी के इस कुत्सित विरोध की कड़ी निंदा करती है। 

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भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कश्यप ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी की यंग इंडियन कंपनी का डोटेक्स मर्चेंडाइज के साथ क्या संबंध है, जो इस गुप्त लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए कोलकाता स्थित हवाला कंपनी है? कश्यप ने कहा कि आज कांग्रेस और राहुल गांधी को कुछ सवालों का जवाब देना चाहिए कि क्या एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) 1930 के दशक में 5000 स्वतंत्रता सेनानियों की भागीदारी के साथ समाचार पत्र प्रकाशित करने के लिए बनाई गई कंपनी थी?

क्या वही कंपनी यंग इंडियंस के माध्यम से गांधी परिवार के तहत अचल संपत्ति का कारोबार नहीं कर रही है? क्या यंग इंडियंस कंपनी का गठन 5 लाख रुपये की पूंजी के साथ हुआ था, जिसका स्वामित्व राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास नहीं था, जिनके पास 76 प्रतिशत शेयर हैं? क्या एजेएल की 2000 करोड़ रुपये से अधिक की पूरी संपत्ति, जो स्वतंत्रता सेनानियों की थी, यंग इंडियंस कंपनी के माध्यम से एक परिवार को नहीं सौंपी गई थी?
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उन्होंने कहा कि 2010 में एजेएल के सभी शेयर गांधी परिवार के यंग इंडिया को हस्तांतरित कर दिए गए थे और इसके साथ ही एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की पूरी संपत्ति गांधी परिवार को एक नकली लेनदेन के माध्यम से दी गई थी।

कश्यप ने कहा कि जनता से चंदे के रूप में कांग्रेस को मिले 90 करोड़ रुपये एजेएल को कर्ज के रूप में दिए गए और बाद में यंग इंडियन को माफ कर दिया गया, जिसने एजेएल से यह कर्ज लिया था। 2010 में यंग इंडिया को एक धर्मार्थ कंपनी केरूप में बनाया गया था, जिसमें 2016 तक कोई धर्मार्थ कार्य नहीं किया गया था, बल्कि इस कंपनी के माध्यम से अचल संपत्ति का काम शुरू हुआ था। 

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