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वीरभद्र ईडी मामले पर कांग्रेस भाजपा में छ़िडी जुबानी जंग

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कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जीआर मुसाफिर, महासचिव रामलाल ठाकुर, कुलदीप सिंह पठानिया, प्रवक्ता डॉ. सुभाष मंगलेट और केवल सिंह पठानिया ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ ईडी में दर्ज मामले की कड़ी निंदा की है। इन नेताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के दबाव में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह मामला दर्ज करवाया है।
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कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री धूमल के खिलाफ जांच शुरू होने से तिलमिलाई भाजपा मुख्यमंत्री के खिलाफ एक और हथकंडा अपनाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता जितने भी षड्यंत्र रचकर झूठे मामले बना ले, लेकिन सीएम का बाल भी बांका नहीं कर सकते। भाजपा के हर षड्यंत्र का कांग्रेस मुंहतोड़ जवाब देगी। कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ मजबूती के साथ खड़ी है।

कहा, मुंहतोड़ जवाब देगी कांग्रेस

महासचिव रामलाल ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के लोगों ने धूमल को सत्ता से बाहर कर वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार को पूर्ण बहुमत देकर चुना है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में यह कार्यकाल भी सरकार पूरा करेगी और अगले विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल करेगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अधीन प्रवर्तन निदेशालय की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और प्रतिशोध की भावना से दर्ज की गई है।

प्रदेश सरकार को अस्थिर करने का कोई भी प्रयास भाजपा का सफल नहीं होगा। बिहार चुनाव में हार से बौखलाई भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता भी केंद्रीय मंत्रियों की हिटलरशाही को बयां कर चुके हैं। अगर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व को भाजपा का कोई भी नेता अस्थिर करने का दुस्साहस करने की कोशिश करेगा तो कांग्रेस इसका मुंहतोड़ जवाब देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा यहां कांग्रेस के धैर्य की परीक्षा न ले और न ही लोकतंत्र में जनमत का अपमान करने की कोशिश करे।

भ्रष्टाचार में डूबे हैं सीएम, कांग्रेस के लिए शर्म की बात: भाजपा

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजीव सहजल, रमा वर्मा, डॉ. राजीव भारद्वाज ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ एफ आईआर किए जाने पर वीरभद्र सिंह से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र न देकर वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। यह न केवल कांग्रेस के लिए शर्मसार कर देने वाली स्थिति है बल्कि प्रदेश की जनता के लिए भी शर्मनाक है।

मुख्यमंत्री पद पर ऐसा व्यक्ति विराजमान है जो भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ डूबा हुआ है। भाजपा नेताओं ने कहा कि नैतिकता का तकाजा है कि मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देने के बाद ही अपने खिलाफ लगे आरोपों का सामना करें क्योंकि पद पर रहते हुए वे इस जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को जनता के समक्ष स्पष्ट करना कि वे हमेशा एक रुपये वेतन लेने का दावा पूर्व में करते रहे हैं और उनके पास आय का एक मात्र साधन उनका सेब का बगीचा है। ऐसे में उनके पास करोड़ों रुपये कैसे आए? भाजपा नेताओं ने वीरभद्र सिंह को सलाह देते हुए कहा है कि वे अपने भ्रष्टाचार के लिए दूसरों को दोष देना बंद करें। इससे उनके गुनाह कम नहीं होंगे बल्कि जितने दिन तक वह सत्ता से चिपके रहेंगे, उतनी ही उनकी छवि लोगों की नजरों में गिरती जाएगी।

राज्य के प्रभारी श्रीकांत ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी बोला हमला

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा आय से अधिक संपत्ति मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने के बाद भाजपा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ फिर से हमलावर हो गई है। राज्य के प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने इस मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल खड़ा करते हुए वीरभद्र का फिर से इस्तीफा मांगा है।

शर्मा ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज होने के बाद यह साफ हो गया है कि हिमाचल के मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्य काला धन को सफेद करने में लगे हुए थे। इसके साथ ही मामला दर्ज होने के बाद भाजपा की ओर से अरसे से लगाए जा रहे आरोपों की भी पुष्टि हो गई है।

राष्ट्रीय सचिव ने भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र में कांग्रेस भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के कृत्रिम मामलों को लेकर हमलावर थी। किसी भी मामले में कोई सुबूत नहीं था। इसके बावजूद कांग्रेस ने पूरे सत्र में कामकाज नहीं होने दिया। अब जबकि हिमाचल के मुख्यमंत्री और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि हो गई है, तब भी कांग्रेस नेतृत्व मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद वीरभद्र मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। उन्हें या तो खुद इस्तीफा देना चाहिए या फिर भ्रष्टाचार पर केंद्र सरकार और भाजपा के मुख्यमंत्रियों पर झूठे आरोप लगाने वाली कांग्रेस नेतृत्व को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
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वीरभद्र-धूमल दोनों की भाषा उनके पद की गरिमा के खिलाफ: हिलोपा

ईडी में मामला दर्ज होने पर हिलोपा ने वीरभद्र सिंह से इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल की भाषा को देखते हुए राज्यपाल से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने और हिमाचल में फिर से चुनाव करवाने की मांग की है।

शिमला संसदीय क्षेत्र के प्रवक्ता देशबंधु सूद और कार्यकारिणी सदस्य हरीश गुलेरिया ने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री बयानबाजी कर रहे हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान करते हुए उन्हें अपने पद से तत्काल त्यागपत्र दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह उनके पद की गरिमा के खिलाफ है।
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