भाजपा के सामने लोकसभा चुनाव में मिशन रिपीट बड़ी चुनौती है। पिछली बार भाजपा ने मोदी लहर में चारों सीटें जीतीं। इस बार भी मुख्यमंत्री कोई सीट खोने का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। इसी चिंता से लंबा चिंतन कर उन्होंने ये थोक नियुक्तियां की हैं। आज बेशक कांग्रेस के कद्दावर नेता वीरभद्र सिंह केवल विधायक की भूमिका में हैं, मगर अब भी प्रदेश कांग्रेस की धुरी वही हैं।
जिस गुड़िया कांड के कारण भी वीरभद्र सरकार सत्ता से बाहर हुई, उसी से प्रेरित होकर गठित सक्षम गुड़िया बोर्ड की उपाध्यक्ष वीरभद्र के शिमला ग्रामीण हलके की नेत्री रूपा शर्मा बनाई गई हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू इस बार नादौन से सिटिंग एमएलए विजय अग्निहोत्री को हराकर चुनाव जीते। पिछली बार विजय ने उन्हें हराया था। अब उनके घेराव को विजय एचआरटीसी के उपाध्यक्ष बनाए गए हैं।
हरोली से राम कुमार की ताजपोशी मुकेश अग्निहोत्री को घेरने के लिए की गई है। राम कुमार ने भाजपा टिकट पर तत्कालीन उद्योग मंत्री मुकेश के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, रूपा शर्मा को किसी खेमे से नहीं जोड़ा जाता, मगर रामकुमार और विजय अग्निहोत्री दोनों भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती की पसंद माने जाते हैं।
पूर्व मंत्री प्रवीण शर्मा और गणेश दत्त धूमल के नजदीकी रहे हैं। इंदौरा के निर्दलीय विधायक रहते भाजपा का दामन थामने वाले मनोहर धीमान को पिछली बार टिकट से वंचित रखा गया और उनके शांता से भी अच्छे संबंध हैं।
सूरत नेगी, दर्शन सैणी और बलदेव तोमर जयराम के विश्वासपात्र हैं। सूरत नेगी किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी और बलदेव तोमर शिलाई के कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन चौहान की चुनाव में परेशानी बढ़ाने को पदों से नवाजे गए हैं। राम सिंह जनसंघ और केंद्रीय नेतृत्व में अच्छी पैठ वाले तथा केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के करीबी हैं। उन्हें इसी का तोहफा मिला है।
केंद्रीय नेतृत्व ने दी थी हरी झंडी, जैसा ठीक लगे करो
बोर्डों-निगमों में इन नियुक्तियों के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सीएम जयराम ठाकुर को फ्री हैंड दिया था कि उन्हें जैसा ठीक लगे, वैसा करो। इसी के चलते जयराम ठाकुर ने काफी सोच विचार के बाद ही यह निर्णय लिया है।