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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में हिमाचल रहा अव्वल

Sat, 08 Sep 2018 12:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित मातृ वंदना सप्ताह समारोह के समापन पर योजना में उल्लेखनीय प्रगति करने पर हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, झारखंड, मध्य प्रदेश, आंध्रप्रदेश और राजस्थान को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी समेत केंद्रीय अधिकारियों ने योजना को तेजी से लागू करने की सभी से अपील की।

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शुक्रवार को मातृ वंदना सप्ताह के समापन समारोह में पीएमएमवीवाई (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना) में उल्लेखनीय कार्य के लिए नार्थ जोन से हिमाचल प्रदेश, नार्थ-ईस्ट जोन से मिजोरम, पूर्वी जोन से झारखंड, सेंट्रल जोन से मध्य प्रदेश, साउथ जोन से आंध्रप्रदेश और वेस्टर्न जोन से राजस्थान को पुरस्कृत किया गया।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर, हरियाणा के पंचकुला और यमुनानगर, असम के ढिब्रूगढ़, पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर और अलीपुरद्वार, मध्य प्रदेश के इंदौर, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले को योजना में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए सम्मान दिया गया। समारोह के अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ.
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राकेश कुमार, अपर सचिव वीसी चौधरी, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल और उत्तराखंड की अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी समेत कई वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र की इस महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से लागू कराएं ताकि अधिक से अधिक गर्भवती महिलाएं योजना का लाभ उठा सके। समारोह में देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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क्या है प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इसके तहत किसी महिला के गर्भधारण करने के 150 दिन के भीतर आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकरण कराने पर एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। एक प्रसव पूर्व जांच कराने के उपरांत गर्भवती को दो हजार रुपये दिए जाते हैं।

जबकि संस्थागत प्रसव कराने के उपरांत प्रसूता को दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस प्रकार पीएमएमवीवाई के तहत प्रत्येक गर्भवती को कुल मिलाकर पांच हजार रुपये की सहायता दी जाती है, लेकिन जागरूकता के अभाव में ज्यादा महिलाएं योजना का लाभ नहीं उठा पा रही हैं।

केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत पूरे देश में अब तक 46.88 लाख महिलाओं का पंजीकरण कराया गया है जबकि 36.83 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिल पाया है।
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