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Bar Council election: हिमाचल बार काउंसिल के लिए 20 अप्रैल को मतदान, 23 को नतीजे, आठ वर्ष बाद हो रहे चुनाव

Thu, 16 Apr 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 बार काउंसिल के चुनाव के लिए 20 अप्रैल को मतदान होगा। सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद आठ साल बाद चुनाव होने जा रहे हैं। 
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हिमाचल बार काउंसिल। - फोटो : Bar Council
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव के लिए 20 अप्रैल को मतदान होगा। सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद आठ वर्ष  बाद चुनाव होने जा रहे हैं। मतदान सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चलेगा। 7,780 अधिवक्ता वोट डालेंगे। वोटिंग के लिए 50 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। चुनावी नतीजे 23 अप्रैल को आएंगे। हिमाचल प्रदेश बार काउंसलिल चुनाव में इस बार कुल 45 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से 43 अनुभवी श्रेणी के हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पहली बार 4 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया के बाद अब उम्मीदवार 53 बार एसोसिएशनों के 7,780 मतदाताओं को लुभाने में जुट गए हैं। यह चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का नहीं, बल्कि बार काउंसिल की जवाबदेही तय करने का है।

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इन पोलिंग बूथों पर होगा मतदान
मतदान के लिए हिमाचल हाईकोर्ट समेत प्रदेशभर के न्यायिक परिसरों में कुल 50 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इनमें हाईकोर्ट में पांच और शिमला जिला न्यायालय परिसर चक्कर में तीन पोलिंग बूथ होंगे। इसके अलावा, चौपाल रोहड़ू, ठियोग और रामपुर, कांगड़ा में धर्मशाला, देहरा गोपीपुर, बैजनाथ, जवाली, नूरपुर पालमपुर और इंदौरा, मंडी में मंडी, सुंदरनगर, करसोग, सरकाघाट, जोगेंद्रनगर व गोहर, सोलन में सोलन, नालागढ़, कसौली अर्की व कंडाघाट, कुल्लू में कुल्लू, बंजार, आनी व मनाली, सिरमौर में नाहन, राजगढ़ व पांवटा साहिब, चंबा में चंबा, तीसा व डलहौजी, हमीरपुर में हमीरपुर, बड़सर, नादौन, बिलासपुर में बिलासपुर, घुमारवीं व झंडूता, ऊना में ऊना व अंब और किन्नौर में रिकांगपिओ में पोलिंग बूथ बनाया गया है।

12 हजार अधिवक्ता पंजीकृत, वोटिंग अधिकार महज 7780 को मिला
प्रदेश की अदालतों में 15 हजार से अधिक अधिवक्ता प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनमें से 12 हजार बार एसोसिएशनों में पंजीकृत हैं। सत्यापन की प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट में मात्र 7,780 वकीलों को ही जगह मिली है। हजारों वकीलों के नाम कटने से 53 बार एसोसिएशनों में गहरा रोष है। वकीलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की तर्ज पर यहां भी फिल्टर लगाकर वास्तविक मतदाताओं को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। हालांकि, पहली बार चुनाव में वकीलों को सहायक निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है जबकि पहले यह भूमिका तहसीलदार या अन्य अधिकारी निभाते थे। इसे लेकर भी वकीलों में अंदरखाते नाराजगी है। चुनाव लड़ने के लिए तय की गई सवा लाख की भारी भरकम नामांकन फीस के चलते कई अधिवक्ता इस चुनाव में भाग नहीं ले सके। आम वकीलों का तर्क है कि इतनी भारी-भरकम राशि के कारण मध्यमवर्गीय और प्रतिभावान वकील नेतृत्व से वंचित रह जाएंगे।
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ये हैं मुख्य चुनावी मुद्दे
वकीलों के साथ बढ़ती हिंसा की घटनाओं के बीच सुरक्षा कानून को लागू करना। युवा वकीलों के लिए स्टाइपेंड और हाईकोर्ट से लेकर तहसील स्तर की बार एसोसिएशनों में चैंबर, शौचालय और ई-लाइब्रेरी की कमी। वर्षों से हाईकोर्ट और अदालतों में जमा क्लेम राशि के भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाना।
 
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