मुख्यमंत्री की बातें सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा, सोच समझ कर बोलें : जयराम
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री की बातें सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा होती हैं, इसलिए सोच समझ का बोलना चाहिए। सुखविंद्र सिंह सुक्खू झूठ बोलकर सबको गुमराह करने का प्रयास करते रहते हैं। सत्र के पहले दिन ऊर्जा के मुद्दे पर चर्चा हुई और अच्छे सुझाव भी आए। जब उत्तर देने की बात आई तो मुख्यमंत्री झूठ बोलकर गुमराह करने की कोशिश करते रहे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूरे देश में वाटर सेस के लिए एक ही नियम बनाए हैं। पंद्रह सालों से हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को विज्ञप्त किया गया, लेकिन कोई निवेश के लिए आगे नहीं आया। पूर्व सरकार ने बिजली उत्पादन की क्षमता का आकलन करने के बाद केंद्र के उपक्रमों को प्रोजेक्ट्स आवंटित किए गए। ताकि प्रदेश सरकार का राजस्व बढ़े। वर्तमान सरकार ने जल कर लगा दिया। अब वाटर सेस की बात पर न्यायालय में जाने से कौन रोक सकता है।
सरकार को न्यायालय में अपना जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री जो अपने आप को कहते हैं कि मैं वकील भी हूं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। हर जगह पूर्व की प्रदेश और केंद्र सरकार को दोषी ठहराना गलत है। जब से वाटर सेस लगाने के लिए आयोग बनाया तब से प्रदेश में हाइड्रो पावर प्रोजेक्टस का भट्ठा बैठ गया। इस तरह की शर्तों के कारण आने वाले समय में प्रदेश में निवेश नहीं आने वाला, राजस्व का भी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 27000 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। जयराम ने कहा कि कांग्रेस का छत्तीसगढ़ और राजस्थान मॉडल फेल हो गया है, मध्यप्रदेश में भी हार का सामना करना पड़ा। यह दौर हिमाचल में भी आगे बढ़ेगा। उन्होंने नवनियुक्त विस उपाध्यक्ष विनय कुमार को बधाई दी। जयराम ने कहा कि उनके समय में इन्वेस्टर मीट से निवेश आने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, दुबई में इन्वेस्टर कॉनक्लेव में एक-एक आदमी से बात हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू की न तो दुबई की कोई फोटो दिखी और नहीं वहां के लोगों से मिलते नजर आए।