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हिमाचल विधानसभा: सीएम सुक्खू बोले- सरकार की शर्तों पर जो काम करेगा, उसे ही बिजली परियोजनाएं दी जाएंगी

Tue, 19 Dec 2023 07:35 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन (धर्मशाला)

सार

मुख्यमंत्री ने वाटर सेस से प्रदेश की आमदनी बढ़ाने के रास्ते में केंद्र सरकार की ओर से रोड़ा डाले जाने पर कहा कि अच्छा होगा कि जयराम ठाकुर नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलें और इस विषय पर हिमाचल के हितों की बात करें। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में दो टूक कहा है कि हिमाचल प्रदेश में जो सरकार की शर्तों पर काम करेगा, उसे ही बिजली परियोजनाएं दी जाएंगी। प्रदेश में पनबिजली परियोजनाओं के लिए भी नीति को बदला जा रहा है। मुख्यमंत्री ने वाटर सेस से प्रदेश की आमदनी बढ़ाने के रास्ते में केंद्र सरकार की ओर से रोड़ा डाले जाने पर कहा कि अच्छा होगा कि जयराम ठाकुर नई दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलें और इस विषय पर हिमाचल के हितों की बात करें। सरकार इस संबंध में किसी भी तरह का श्रेय नहीं लेना चाहती। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में भी भाजपा की सरकारें हैं। वहां पर वाटर सेस का विरोध नहीं हो रहा है। 2024-25 से पहले 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लगाया जाएगा। पंद्रह दिनों के अंदर 17 जगहों पर चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे।

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नवीकरणीय ऊर्जा पर कांग्रेस विधायक चैतन्य शर्मा की ओर से लाई गई चर्चा के पूरा होने के बाद अपने जवाब में सुक्खू ने मंगलवार को सदन में कहा कि 42 परियोजनाओं को अगले जून माह तक लगा दिया जाएगा। 25 मेगावाट की तीन परियोजनाएं अवार्ड होने की स्थिति में हैं। 50 मेगावाट के एक अन्य प्रोजेक्ट पर भी काम हो रहा है। सरकार ने युवाओं को भी एक ऑफर दिया है कि तीन बीघा जमीन देने पर उन्हें मासिक 20,000 रुपये सरकार देगी। वहां सोलर परियोजनाएं लगाई जाएंगी। प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन पैदा करने पर भी काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी परियोजना को वर्तमान सरकार ने ही लाया है। सरकार ने सत्ता में आने के चार महीने में ही सबसे बड़ी परियोजना को लाया है। अब आने वाले छह महीने में दूसरी बड़ी परियोजना को भी ला रहे हैं। प्रदेश में ई-वाहनों पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे हिमाचल प्रदेश की बिजली पर करोड़ाें रुपये की लागत की बचत होगी। सर्दियों में इससे बिजली की कमी को भी पूरा किया जा सकेगा।

हिमाचल प्रदेश की कुल क्षमता 24,567 मेगावाट की
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि जबसे सरकार बनी है, तबसे इस पर काम हो रहा है कि हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर कैसे बने। आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश को बनाने के लिए पनबिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में काम किया जा रहा है। पिछली भाजपा सरकार ने अपनी परियोजनाएं एसजेवीएनएल को दे दीं। उन्हें परियोजनाएं दे दीं, पर इससे हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी होती रहीं। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कुल क्षमता 24,567 मेगावाट की है। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल चार साल में आत्मनिर्भर होगा।
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जयराम ने टोका, ऐसा नहीं कि पिछले मुख्यमंत्रियों ने कुछ नहीं किया
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सीएम को बीच में टोकते हुए कहा कि बार-बार व्यवस्था परिवर्तन की बातें की जा रही हैं कि यह सब उन्होंने ही किया। आज से पहले जो भी सरकारें रहीं हों या मुख्यमंत्री रहे हों, उन्होंने मानो कुछ न किया हो। यह कहना सही नहीं है। हिमाचल प्रदेश में सोलर पॉवर का पांच मेगावाट का प्रोजेक्ट भाजपा ने लाया था। उन्होंने कहा कि सीएम की बातों में सच्चाई नहीं है।

 

मुख्यमंत्री की बातें सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा, सोच समझ कर बोलें : जयराम
 नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री की बातें सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा होती हैं, इसलिए सोच समझ का बोलना चाहिए। सुखविंद्र सिंह सुक्खू झूठ बोलकर सबको गुमराह करने का प्रयास करते रहते हैं। सत्र के पहले दिन ऊर्जा के मुद्दे पर चर्चा हुई और अच्छे सुझाव भी आए। जब उत्तर देने की बात आई तो मुख्यमंत्री झूठ बोलकर गुमराह करने की कोशिश करते रहे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूरे देश में वाटर सेस के लिए एक ही नियम बनाए हैं। पंद्रह सालों से हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को विज्ञप्त किया गया, लेकिन कोई निवेश के लिए आगे नहीं आया। पूर्व सरकार ने बिजली उत्पादन की क्षमता का आकलन करने के बाद केंद्र के उपक्रमों को प्रोजेक्ट्स आवंटित किए गए। ताकि प्रदेश सरकार का राजस्व बढ़े। वर्तमान सरकार ने जल कर लगा दिया। अब वाटर सेस की बात पर न्यायालय में जाने से कौन रोक सकता है।
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सरकार को न्यायालय में अपना जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री जो अपने आप को कहते हैं कि मैं वकील भी हूं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है। हर जगह पूर्व की प्रदेश और केंद्र सरकार को दोषी ठहराना गलत है। जब से वाटर सेस लगाने के लिए आयोग बनाया तब से प्रदेश में हाइड्रो पावर प्रोजेक्टस का भट्ठा बैठ गया। इस तरह की शर्तों के कारण आने वाले समय में प्रदेश में निवेश नहीं आने वाला, राजस्व का भी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 27000 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। जयराम ने कहा कि कांग्रेस का छत्तीसगढ़ और राजस्थान मॉडल फेल हो गया है, मध्यप्रदेश में भी हार का सामना करना पड़ा। यह दौर हिमाचल में भी आगे बढ़ेगा। उन्होंने नवनियुक्त विस उपाध्यक्ष विनय कुमार को बधाई दी। जयराम ने कहा कि उनके समय में इन्वेस्टर मीट से निवेश आने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, दुबई में इन्वेस्टर कॉनक्लेव में एक-एक आदमी से बात हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू की न तो दुबई की कोई फोटो दिखी और नहीं वहां के लोगों से मिलते नजर आए।
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