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हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: बायोमेट्रिक हाजिरी से अब भी दूर हिमाचल के 400 दफ्तर, जानें पूरा मामला

Wed, 26 Aug 2026 07:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 सरकार के विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों और संस्थानों में बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली को अनिवार्य किए जाने के बावजूद 400 ऐसे कार्यालय हैं, जहां आज भी कर्मचारियों की हाजिरी बायोमेट्रिक या ऑनलाइन माध्यम से दर्ज नहीं हो रही है। 
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बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों और संस्थानों में बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली को अनिवार्य किए जाने के बावजूद 400 ऐसे कार्यालय हैं, जहां आज भी कर्मचारियों की हाजिरी बायोमेट्रिक या ऑनलाइन माध्यम से दर्ज नहीं हो रही है। विधानसभा में मुख्यमंत्री की ओर से प्रस्तुत लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई कि प्रदेश के अनेक विभागों के फील्ड स्टाफ और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति अब भी रजिस्टर अथवा विभागीय अभिलेखों के माध्यम से दर्ज की जा रही है।

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आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद 18 नवंबर 2022 को सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों में बायोमेट्रिक सिस्टम से उपस्थिति लागू करने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कई कार्यालयों और फील्ड इकाइयों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। सरकार की ओर से सदन में रखी गई जानकारी के अनुसार निर्वाचन, कृषि, गृह, जल शक्ति, भाषा एवं संस्कृति, लोक निर्माण, पर्यटन, सैनिक कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, वन, आयुष, ग्रामीण विकास, राजस्व तथा अन्य विभागों के अनेक कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित नहीं हैं या उनका उपयोग नहीं हो रहा है।

कई जिलों और उपमंडलीय कार्यालयों में कर्मचारी अब भी पारंपरिक उपस्थिति रजिस्टर पर निर्भर हैं। सरकार ने बताया कि जल शक्ति, वन, बिजली, पुलिस, अग्निशमन, राजस्व, ग्रामीण विकास और अन्य विभागों के फील्ड स्टाफ का कार्यक्षेत्र व्यापक और बिखरा हुआ होता है। कर्मचारियों को दिनभर विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण, सर्वेक्षण, रखरखाव और आपात सेवाओं के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में किसी एक स्थान पर स्थापित बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से नियमित उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक नहीं है। कई दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की कमी भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
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विशेष रूप से वन विभाग ने बताया कि फील्ड स्टाफ की उपस्थिति टूर डायरी और कार्य अभिलेखों के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है, जबकि पुलिस और अग्निशमन विभागों में कर्मचारियों की ड्यूटी 24 घंटे और आपात परिस्थितियों से जुड़ी होने के कारण बायोमेट्रिक व्यवस्था व्यावहारिक नहीं मानी गई है। सरकार ने यह भी बताया कि जिन कर्मचारियों को कार्यालय समय से पहले या बाद में विधिवत अतिरिक्त ड्यूटी के लिए लगाया जाता है, उन्हें नियमों के तहत प्रतिपूरक अवकाश देने का प्रावधान है। छह घंटे से अधिक अतिरिक्त ड्यूटी के बदले एक कम्पेनसेटरी लीव दी जा सकती है, जबकि ओवरटाइम भत्ता पाने वाले कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिलती। वर्तमान में बायोमेट्रिक उपस्थिति से संबंधित नई नीति या योजना बनाने की आवश्यकता नहीं समझी गई है। हालांकि कुछ विभागों में तकनीकी समाधान तलाशने और उपस्थिति दर्ज करने के वैकल्पिक माध्यमों पर विचार जारी है।
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