केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत ने कांग्रेस के घोषणापत्र को कांग्रेस नेताओं की हताशा का मैनिफेस्टो करार दिया। भाजपा का आरोप है कि बुधवार को जारी घोषणापत्र में कानून व्यवस्था का उल्लेख तक नहीं है। रोजगार के झूठे दावे हैं।
पिछली बार बीपीओ खोल रोजगार देने के वादे पर कुछ नहीं हुआ। पांच साल में बीस हजार करोड़ का ऋण लेकर प्रदेश को पचास हजार करोड़ का ऋणी बना दिया। वित्तीय प्रबंधन पर कोई प्लानिंग घोषणापत्र में नहीं दिखी।
न ई-कोर्ट खुले, न पात्रों को बेरोजगारी भत्ता मिला और न ही युवाओं को चार फीसदी दर से शिक्षा ऋण मिला। पिछले घोषणापत्र में 31 मुख्य बिंदुओं में किए 222 वादों में 108 पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। भाजपा ने 45 बिंदुओं पर एक दस्तावेज जारी किया है।
पार्टी मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता में गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने 100 प्रतिशत घोषणाएं पूरी की हैं। भाजपा ने कांग्रेस के घोषणापत्र में किए वादों को कोरा झूठ पाया है।
कांग्रेस जीएसटी में छूट की दर 10 से 20 लाख करने की बात कर रही है, जबकि यह वीरभद्र सरकार की गलती है कि व्यापारी वर्ग के लिए निम्न दर तय की गई। केंद्र की कौशल विकास योजना में प्रशिक्षित 70 हजार बेरोजगारों को मिलने वाले भत्ते को बेरोजगारी भत्ता दिखा दिया।
मात्र 3300 बेरोजगारों को रोजगार मिला
रोजगार कार्यालयों में 8 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं, लेकिन 2016 में मात्र 3300 बेरोजगारों को रोजगार मिला है। कर्मचारियों को 4-9-14 के टाइम स्केल का दावा किया, जबकि पांच वर्ष में कर्मचारी संघों की मांग को नकार दिया। डेढ़ लाख बेरोजगारों को रोजगार देने का रोडमैप तक नहीं है।
पिछली बार बीपीओ खोलने की घोषणा की थी, जिसे पूरा नहीं किया। रूसा के तहत खामियों से उसे समाप्त करने की मांग की अनदेखी हुई, जबकि अब उसे घोषणापत्र में डाल दिया। किसानों के एक लाख ऋण का कर्ज या ब्याज माफी का वादा किया। गहलोत बोले - कांग्रेस स्पष्ट करे कि ब्याज माफ होगा या पूरा कर्ज। भाजपा के घोषणापत्र में राजस्व बढ़ाने और कर्जे घटाने का पूरा उल्लेख है।
कई बिंदुओं पर मांगा जवाब
- जन शिकायत आयुक्त की तैनाती अब तक क्यों नहीं हुई।
- पंचायतों के लिए ई-कोर्ट की स्थापना अब तक कागजों में।
- पांच सालों में 40 प्रतिशत सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने की घोषणा का क्या हुआ।
- कोल्ड स्टोरों की स्थापना अब तक क्यों नहीं हुई।
- किसानों के लिए घोषित राज्य कृषि आयोग का गठन नहीं कर पाई सरकार।
- सेब के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने पर कुछ नहीं हुआ।
- फलों की किस्में विकसित करने को नए अनुसंधान केंद्र कहां बनाए गए।
- कृषि और बागवानी के उद्यम स्थापित कहां किए गए।
- कांगड़ा चाय के विकास के लिए क्या कदम उठाए।
- दुग्ध उत्पादकों के लिए महिला सहकारी सभाओं को स्थापना कब होगी।
- सभी माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी खोलनी की घोषणा पर अमल कब।
- आवासीय स्कूल नहीं खुले, सैन्य बलों में जाने के लिए मुफ्त प्रशिक्षण केंद्र नहीं बने।
- पंजाब की तर्ज पर 500 रुपये मासिक मेडिकल अलाउंस अभी तक नहीं मिला।
- न्याय पंचायतों की स्थापना और न्याय सहायकों को अनुदान पर कोई कार्यवाही नहीं।
- पेंशनरों के 65, 70 और 75 वर्ष पर 5, 10 और 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन अधूरी।