विधानसभा चुनाव के नतीजों में परिवारवाद को लेकर अलग-अलग तरह के समीकरण सामने आए हैं। वीरभद्र और सुखराम के परिवारों ने जहां हिमाचल की राजनीति में अपनी धमक का परिणाम देते हुए बेटों की विधानसभा में एंट्री करवाई है।
वहीं धूमल और कौल सिंह के परिवारों का करिश्मा मतदाताओं को रिझा नहीं सका है। भाजपा के मुख्यमंत्री पद के चेहरे प्रेमकुमार धूमल के पुत्रों अनुराग-अरुण की दौड़भाग बेकार चली गई है। यहां धूमल के चेले राजेंद्र राणा ने जीत दर्ज कर अपना कमाल दिखाया।
हिमाचल का विधानसभा चुनाव दो चेहरों पर लड़ा गया। सत्तारूढ़ कांग्रेस का चेहरा सीएम वीरभद्र सिंह थे और भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार को प्रदेश में पार्टी चेहरा बनाया। खास यह है कि भाजपा और कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार ये दोनों ही नेता इस बार नई सीटों पर चुनाव लड़े।
धूमल हमीरपुर सदर के बजाय सुजानपुर और वीरभद्र सिंह शिमला ग्रामीण सीट बेटे विक्रमादित्य को छोड़ अर्की से चुनाव लड़े। वीरभद्र सिंह खुद अर्की से जीते तो बेटे को शिमला ग्रामीण से भी जितवा दिया। लेकिन प्रेमकुमार धूमल सुजानपुर फतह नहीं कर सके।