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सता संग्रामः मतदान में आगे, नुमाइंदगी में पीछे सूबे की महिलाएं

Sun, 15 Oct 2017 01:43 PM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
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सूबे में सियासी महासमर शुरू हो गया है। पिछले चुनावों की तरह इस बार भी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को रिझाने की तैयारी में हैं। कारण, आधी आबादी का मतदान प्रतिशत पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा रहता है। 
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महिला वोट बैंक की ताकत को देखते हुए कोई भी पार्टी या प्रत्याशी इन्हें नजरंदाज नहीं करना चाहता। लेकिन वोट प्रतिशत में आगे होने के बावजूद नुमाइंदगी के मामले में प्रदेश की महिलाएं पिछड़ रही हैं। 

33 प्रतिशत आरक्षण की हिमायत करने वाले बड़े राजनीतिक दल भी महिला प्रत्याशियों को टिकट देने से कतराते हैं। विधानसभा चुनाव 2017 में यह देखने लायक होगा कि आखिर मतदान में पुरुषों को पछाड़ने वाली महिलाओं को इस बार नुमाइंदगी के लिहाज से कितनी तवज्जो मिलती है।
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मतदान और नेतृत्व में जमीन आसमान का अंतर

सूबे में मतदान और नेतृत्व में महिलाओं की अब तक रही भूमिका में जमीन आसमान का अंतर है। एक तरफ जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रहा है वहीं दूसरी तरफ विधानसभा में महिलाओं की नुमाइंदगी नाम मात्र भर ही रही है।

पिछले चार विधानसभा चुनावों के आंकड़े ही लें तो महिलाओं ने वोट प्रतिशत में पुरुषों को हर बार पछाड़ा है। 2012 में 16 लाख 83 हजार 278 के सापेक्ष महिलाओं के 17 लाख 4 हजार 112 वोट पड़े थे। इससे पहले 2007 में 16.17 लाख पुरुषों और 16.79 लाख महिलाओं, 2003 में 15.22 लाख पुरुषों और 15.33 लाख महिलाओं, 1999 में 12.83 लाख पुरुषों और 13.01 लाख महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

इन सभी विधानसभा चुनावों के दौरान महिलाओं का जीत का प्रतिशत कुल प्रत्याशियों के मुकाबले दहाई का आंकड़ा भी छू नहीं पाया। यही नहीं, 50 प्रतिशत से ज्यादा महिला वोटर वाले चुनावों में भाजपा और कांग्रेस की महिला प्रत्याशियों के अलावा एक भी प्रत्याशी को दस प्रतिशत से ज्यादा वोट नहीं मिल सके।

बात 33 प्रतिशत आरक्षण की, टिकट आधों को भी नहीं

देश के बड़े सियासी दल संसद से लेकर विधानसभा तक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की हिमायत करते हैं। आधी आबादी को पर्याप्त नेतृत्व देने पर भाषण भी होते हैं लेकिन टिकट देने से पार्टियां कन्नी काट लेती हैं।

2012 के चुनाव में भाजपा ने दस प्रतिशत महिला प्रत्याशियों को उतारा था। हालांकि, इनमें सिर्फ एक ही महिला जीत सकी। कांग्रेस ने चार महिला प्रत्याशियों को उतारा, जिनमें से दो जीतीं। महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष वाली बहुजन समाज पार्टी ने 66 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 3 महिलाओं को ही टिकट दिया।
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1998 में सबसे ज्यादा थी महिला विधायकों की संख्या

सूबे के चुनावी इतिहास को टटोलें तो 1998 का एक अकेला ऐसा चुनाव सामने आता है, जिसमें चुनाव मैदान में उतरीं 25 प्रत्याशियों में से 6 विधानसभा पहुंचने में सफल रहीं थीं। यह अकेला मौका था, जब इतनी संख्या में महिला विधायक विधानसभा में पहुंचीं। इसके अलावा 2007 में भी 25 में से 5 प्रत्याशी जीतीं। इसके अलावा अन्य तमाम चुनावाें में महिला विधायकाें की संख्या पांच नहीं पहुंची।

साल                    कुल प्रत्याशी            महिला प्रत्याशी                जीती प्रत्याशी
2012                    459                        34                                    3
2007                    336                        25                                    5
2003                    408                        31                                    4
1998                    369                        25                                    6
1993                    416                        17                                    3
1990                    454                        18                                    4
1985                    294                        10                                    3
1982                    441                        09                                   3
1977                    330                        09                                   1
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