विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्थानीय और कांग्रेस आलाकमान ने केंद्रीय नेताओं को प्रचारक बनाने को तरजीह दी है। भाजपा की ओर से 40 प्रचारकों में से 13 स्थानीय हैं। कांग्रेस ने 40 में से प्रदेश के केवल चार स्थानीय नेताओं को प्रचार का जिम्मा सौंपा है।
भाजपा का मानना है कि स्थानीय प्रचारकों को हिमाचल की ज्यादा जानकारी रहती है। इधर, कांग्रेस का तर्क है कि हिमाचल के कई दिग्गज चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में मुख्य नेताओं को प्रचारक तौर पर लिया है। 26 अक्तूबर से यह दिग्गज हिमाचल में प्रचार शुरू कर देंगे।
कांग्रेस हाईकमान ने 9 मंत्रियों में से कौल सिंह और जीएस बाली दो मंत्रियों को लिया है। सात मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र में प्रचार में डटे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन मंत्रियों को सिर्फ अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र संभालने को कहा गया है।
ये हैं भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय प्रचारक
पार्टी के दो मंत्रियों को अपने विधानसभा क्षेत्र के अलावा जिलों में रैलियां और बैठकें भी करनी हैं। भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष धूमल और पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती के अलावा 11 स्थानीय नेताओं को जिलों में रैलियां और बैठकों का जिम्मा सौंपा गया है।
भाजपा ने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल और चार सांसद शांता, अनुराग, विरेंद्र कश्यप और राम स्वरूप, प्रवीण शर्मा, गणेश दत्त, संदीपनी भारद्वाज, उत्तम चौधरी, सिकंदर, सूरत नेगी और विशाल चौहान को लिया है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू, कौल सिंह और जीएस बाली को शामिल किया है।