हिमाचल विधानसभा चुनाव में इस बार भी बागी चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। बागियों ने कांग्रेस और भाजपा दोनों की दलों की मुश्किलें बढ़ा दी है। कई नेता टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं तो कई ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला कर लिया है।
ऐसे में दोनों दलों के लिए इन बागी नेताओं को मनाना टेढी खीर बन गया है। अगर इन बागियों को नहीं मनाया गया तो इसका खामियाजा दोनों दलों को चुनाव में भुगतना पड़ेगा। इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर होना तय है। शनिवार को ही दोनों दलों से कई नेताओं ने बगावती तेवर दिखाए है।
इन्होंने दिया इस्तीफा
पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष टेकचंद डोगरा और प्रदेश कांग्रेस सचिव संजू डोगरा ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। नाचन से पूर्व विधायक टेकचंद डोगरा को कांग्रेस टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने हाईकमान को 23 अक्तूबर तक पुन: निर्णय लेने का अल्टीमेटम दिया है।
शनिवार को छातर गांव में ब्लॉक अध्यक्ष टेक सिंह राघवा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें टेकचंद डोगरा के समर्थक उपस्थित रहे। बैठक में टेकचंद को टिकट न मिलने पर चर्चा की गई और टिकट आवंटन में पूर्व विधायक की अनदेखी पर नाराजगी जताई गई।
इसमें एकमत से निर्णय लेते हुए प्रस्ताव पारित कर हाईकमान को भेजा गया। इसमें टेकचंद डोगरा को टिकट देने की मांग की गई। साथ ही कहा गया कि हाईकमान ने टेकचंद डोगरा को टिकट नहीं दिया तो वे उन्हें आजाद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारेंगे।
प्रदेश कांग्रेस सचिव संजू डोगरा ने कहा कि उन्होंने इपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। उनके पिता पूर्व विधायक टेक चंद डोगरा को 23 अक्तूबर तक अगर हाईकमान ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया तो उन्हें आजाद चुनाव में उतरा जाएगा।
ब्लॉक अध्यक्ष टेक सिंह राघवा ने कहा कि हाईकमान ने ब्लॉक से भेजे गए एक भी नाम पर मुहर नहीं लगाई है। इसके चलते उन्होंने त्यागपत्र दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1993 में टेक चंद डोगरा का टिकट कटने पर उन्होंने आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था, उसी तर्ज पर इतिहास अपने आप को एक बार फिर दोहराएगा।
वीरभद्र ने कुछ लोगों के कहने पर काटा टिकट : खूबराम
आनी के सिटिंग विधायक खूबराम आनंद ने टिकट कटने के बाद आखिर चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने आलाकमान और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर उनका टिकट काटने को लेकर सवाल उठाए हैं। खूबराम ने कहा कि अंतिम समय तक उनका नाम अखबारों, टीवी में आता रहा।
खुद वीरभद्र सिंह ने टिकट पक्का रहने का वादा किया था। आलाकमान ने बयान जारी किया कि सिटिंग विधायकों का टिकट नहीं कटेगा तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि वीरभद्र सिंह को अपनी जुबान से मुकरना पड़ा। जो कुछ भी हुआ, वह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
खूबराम आनंद ने आरोप लगाया कि उनका टिकट कुछेक लोगों के कहने पर वीरभद्र सिंह ने पुत्र मोह में काटा है। विधायक के तौर पर उन्होंने अंतिम समय तक आनी विधानसभा क्षेत्र में काम किया।
सड़कों और कई अन्य योजनाओं के उद्घाटन गांव-गांव जाकर किए, जबकि उनके बारे में झूठ फैलाया गया कि खूबराम आनंद बीमार हैं और चलने-फिरने के काबिल नहीं हैं।
बीजेपी पार्षद संजीव ठाकुर लड़ेंगे आजाद
शिमला शहर सीट का चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के बाद अब इस सीट पर भाजपा में बगावत हो गई है। बीजेपी के मौजूदा विधायक सुरेश भारद्वाज को सीधे तौर पर शिमला शहर व्यापार मंडल के महासचिव और मौजूदा बीजेपी पार्षद संजीव ठाकुर ने सीधी चुनौती दे दी है।
शनिवार शाम को समर्थकों के साथ बैठक के बाद उन्होंने आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। संजीव ने कहा कि वह समर्थकों के साथ सोमवार को नामांकन भरने जाऐंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा मंडल इस बार सुरेश भारद्वाज को टिकट देने के विरोध में था
बावजूद इसके पार्टी ने भारद्वाज को ही चुनाव मैदान में उतार दिया। इस फैसले से निराशा होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है। संजीव ठाकुर रूल्द्भट्टा से दो बार भाजपा टिकट पर पार्षद रह चुके हैं और इनकी पत्नी सरोज ठाकुर भी इस वार्ड से भाजपा से दो बार पार्षद रह चुकी है।
इस बार नगर निगम चुनाव में संजीव ने कांग्रेस प्रत्याशी को सीधे मुकाबले में 492 वोटों से हराया था। संजीव ठाकुर इस बार डिप्टी मेयर के प्रबल दावेदारों में से एक थे लेकिन भाजपा ने उनकी दावेदारी को दरकिनार करते हुए पहली बार चुनाव जीतकर आए राकेश कुमार शर्मा को डिप्टी मेयर बना दिया।
भाजपा का एक गुट सुरेश भारद्वाज की जगह किसी नए चेहरे को उतारने के पक्ष में था लेकिन पार्टी हाईकमान के सामने उनकी एक न चली और सुरेश भारद्वाज टिकट झटकने में कामयाब हो गए। भारद्वाज ने शहर में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है लेकिन उनका विरोधी गुट प्रचार से गायब है।
इसी दौरान संजीव ठाकुर का आजाद प्रत्याशी ताल ठोंक देना भाजपा प्रत्याशी के लिए संकट पैदा कर देना है हालांकि कांग्रेस में भी प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी के खिलाफ हरीश जनारथा की बगावत ने कांग्रेस को भी मुश्किल में डाल रखा है। ऐसी स्थिति में चुनाव रोचक हो गया है।
इस खींचतान में कांग्रेस, भाजपा, माकपा या आजाद किसके सिर जीत का सेहरा सजता है यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन भाजपा और कांग्रेस के इन बागियों ने पार्टी के प्रत्याशियों की नींद उड़ा दी है।
कसुम्पटी से बीजेपी के वीडी शर्मा भी हुए बागी
कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्रेम ठाकुर के बाद अब वी डी शर्मा ने आजाद लड़ने का ऐलान किया है। वीडी शर्मा सोमवार को समर्थकों के साथ नामांकन भरेंगे।
वीडी शर्मा भाजपा से टिकट के दावेदारों में से एक थे। उन्होेंने कहा कि शनिवार को समर्थकों के साथ हुई चर्चा के बाद उन्होंने आजाद लड़ने का फैसला किया है।