शिमला ग्रामीण से भाजपा प्रत्याशी एवं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के प्रोफेसर प्रमोद शर्मा को हाईकोर्ट से राहत मिली है। वरिष्ठ न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से आठ हफ्ते के भीतर मामले का निपटारा करने के लिए कहा है।
एचपीयू ने 4 दिसंबर 2014 को एक अध्यादेश पारित किया था जिसमें शिक्षकों और कर्मचारियों के राजनीति में जाने पर रोक लगाई है। सितंबर 2017 में प्रमोद शर्मा ने इस अध्यादेश को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी।
18 अक्तूबर को याचिका की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने अध्यादेश पर रोक लगा दी। इस रोक के खिलाफ एचपीयू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
अध्यादेश पर रोक बरकरार रही तो विधानसभा चुनाव का परिणाम कुछ भी रहे, एचपीयूबीएस के शिक्षक प्रो. प्रमोद शर्मा की नौकरी पर अब कोई संकट नहीं होगा।
एचपीयू ने फिलहाल प्रमोद शर्मा का मामला कोर्ट के विचाराधीन होने के कारण सशर्त चुनाव के लिए आवश्यक एनओसी और एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लीव मंजूर की है।
कुल सचिव प्रो. एसएस नारटा ने कहा कि एचपीयू की ओर से सिर्फ ऑर्डिनेंस को सही तरीके से लागू करने के लिए ही हाईकोर्ट में ट्रिब्यूनल के स्टे के खिलाफ याचिका दायर की थी।