हिमाचल के सदर ऊना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस टिकट के एक दावेदार ने सुंदर कांड पाठ के बहाने जनसभा ही कर डाली। नेताजी ने जिला और बाहर से पार्टी पदाधिकारियों को बाकायदा प्रीतिभोज के लिए निमंत्रण भेजा गया। इसको लेकर बुक कराए गए निजी होटल में काफी भीड़ जुटी।
प्रीतिभोज धार्मिक समारोह के समापन का था, लेकिन नेताजी ने पूरा सियासी मंच ही सजा लिया। कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए पंडाल में बैठने का विशेष इंतजाम किया था, जबकि अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए मंच पर माइक सिस्टम भी लगाया था।
धार्मिक समारोह का माहौल उस वक्त अचानक सियासी रंग में बदल गया, जब कार्यक्रम के आयोजक टिकट के दावेदार ने मंच पर से राजनीतिक भाषण शुरू कर दिया। पार्टी पदाधिकारियों को जब धार्मिक समारोह में सियासी कार्यक्रम की भनक लगी तो वे समारोह से खिसक लिए।
कुछ पदाधिकारियों को मजबूरन कार्यक्रम में बैठना पड़ा। सियासी रंग में रंगे इस धार्मिक कार्यक्रम को देख हर ओर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया पर उन पदाधिकारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो कार्यक्रम में मौजूद थे।
एक ओर दिल्ली में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व टिकट आवंटन को लेकर माथापच्ची कर रहा है, दूसरी ओर टिकट को लेकर नेताओं ने इस तरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं।
टिकटों के आवंटन के इस दौर में जिले के पदाधिकारी भी दावेदारों के पास जाने से परहेज कर रहे हैं। धार्मिक कार्यक्रम के बहाने दावेदार के घर पहुंचे कई नेता अब सफाई देते फिर रहे हैं।
राजनीतिक माहौल देख लौट आया
जिला कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र धर्माणी ने कहा कि उन्हें टिकट के दावेदार की ओर से धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन मौके पर राजनीतिक माहौल देख वह भोजन किए बिना ही लौट आए।
उन्होंने बताया कि मंच पर कुछ स्थानीय पार्टी नेता मौजूद थे। दावेदार की ओर से जब राजनीतिक भाषण शुरू किया गया तो वे उठकर चले आए। उन्होंने कहा कि उनकी मौजूदगी को किसी पदाधिकारी के समर्थन से जोड़कर न देखा जाए।
कार्यक्रम के समापन पर रखी गई थी बैठक
संबंधित कांग्रेस नेता का कहना है कि धार्मिक आयोजन संपन्न हो चुका था। भोजन के बाद कार्यकर्ताओं की बैठक रखी गई थी, जो पूर्व निर्धारित थी। अगर किसी नेता को इस पर आपत्ति थी तो वो बैठक में शामिल न होते।