हिमाचल में विधानसभा चुनाव का ऐलान होने के बावजूद अभी तक तीसरे मोर्चे में कोई भी सुगबुगाहट शुरू नहीं हुई है। दिल्ली में भारी बहुमत से सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी ने हिमाचल में लगभग हथियार डाल दिए हैं। माना जा रहा है कि पंजाब के विधानसभा चुनाव से हतोत्साहित होने के बाद पार्टी हिमाचल में चुनाव लड़ने से बच रही है।
पार्टी के शीर्ष नेता अभी तक चुनाव लड़ने का फैसला नहीं ले सके हैं। प्रदेश में तीसरे मोर्चे का दम भरने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया भी प्रदेश के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में ही प्रत्याशी उतारने तक सीमित हो गई है।
बहुजन समाज पार्टी हर चुनाव में अधिकांश सीटों से प्रत्याशी तो उतारती रही है लेकिन पार्टी के पास दमदार चेहरा नहीं होना हर बार हार का कारण बनता रहा है। तीसरे मोर्चे के नाम पर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, लोक जन शक्ति पार्टी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी भी भाग्य आजमाती रही है। लेकिन किसी के हाथ भी सफलता नहीं लग पाई।
पंजाब में हार से टूटा मनोबल
हिमाचल में साल 1998 से लेकर 2012 तक के विधानसभा चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय बनता रहा है। दिल्ली में जीत दर्ज करने के बाद आम आदमी पार्टी ने हिमाचल में तीसरा विकल्प देने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन पंजाब में हार से पार्टी का मनोबल टूट गया है। बीते छह माह के दौरान पार्टी के किसी भी बड़े नेता ने हिमाचल का रुख तक नहीं किया है।
हिमाचल में किसी भी नेता को पार्टी की कमान भी नहीं सौंपी गई हैं। हिमाचल में आम आदमी पार्टी की करीब एक साल से राज्य कार्यकारिणी भंग है। कार्यकारिणी का पुनर्गठन करने को लेकर भी पार्टी गंभीर नजर नहीं आ रही है। शीर्ष नेताओं की हिमाचल के प्रति बरती जा रही इस बेरुखी के चलते प्रदेश में पार्टी का झंडा बुलंद करने वाले कार्यकर्ता भी धैर्य खो रहे हैं।
ये नेता भी भाजपा और कांग्रेस में जाने की फिराक में हैं। ऐसे में इस बार के विधानसभा चुनाव में हिमाचल में तीसरा मोर्चा खड़े होने की सभी संभावनाएं शून्य नजर आ रही हैं। इन परिस्थितियों के चलते हिमाचल में इस बार कांग्रेस और भाजपा में सीधी जंग होने के आसार बन गए हैं।
अभी नहीं लिया फैसला: संजय
हिमाचल में विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर पार्टी ने अभी कोई भी अंतिम फैसला नहीं लिया है। मामला वरिष्ठ नेताओं के विचाराधीन है। तीन-चार दिन के भीतर इस बारे में स्थिति स्पष्ट की जाएगी। - संजय सिंह, आम आदमी पार्टी के हिमाचल प्रभारी
जल्द घोषित करेंगे प्रत्याशी : विजय
बहुजन समाज पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। प्रदेश की अधिकांश सीटों से उम्मीदवार उतारे जाएंगे। एक-दो दिन के भीतर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए जाएंगे। - विजय नैय्यर, बसपा प्रदेश अध्यक्ष
हिविकां, बसपा, हिलोपा ने त्रिकोणीय बनाए चुनाव
प्रदेश में हिमाचल विकास कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और हिमाचल लोकहित पार्टी ने तीन चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबले बनाए हैं। साल 1998 में पूर्व संचार मंत्री पंडित सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेेस की अगुवाई में तीसरा मोर्चा बनाया था।
हिविकां के पांच विधायक बने। उस समय भाजपा और कांग्रेस की 31-31 सीटों पर जीत हुई। हिविकां के सहयोग से तब प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी।
साल 2007 और 2012 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने मुकाबला त्रिकोणीय बनाया। बसपा ने साल 2007 में 67 और 2012 में 66 सीटों पर प्रत्याशी उतारे।
साल 2007 में कांगड़ा से बसपा ने जीत भी दर्ज की। साल 2012 में महेश्वर सिंह ने भाजपा से अलग होकर हिमाचल लोकहित पार्टी बनाई। प्रदेश के 36 विधानसभा क्षेत्रों से प्रत्याशी उतारे। पार्टी ने कुल्लू से एक सीट पर जीत दर्ज की।
विधानसभा चुनाव 2012
विधानसभा चुनाव 2012
दल प्रत्याशी उतारे जीते जमानत जब्त
बसपा 66 0 66
हिलोपा 36 1 35
सीपीएम 16 0 14
एनसीपी 13 0 13
लोजपा 17 0 17
सपा 15 0 15
विधानसभा चुनाव 2007
दल प्रत्याशी उतारे जीते जमानत जब्त
बसपा 67 1 59
सीपीआई 8 0 8
सीपीएम 7 0 6
एनसीपी 4 0 4
लोजपा 39 0 38
सपा 10 0 10
विधानसभा चुनाव 2003
दल प्रत्याशी उतारे जीते जमानत जब्त
हिविकां 49 1 41
बसपा 23 0 23
सीपीआई 7 0 7
सीपीएम 4 0 3
एनसीपी 14 0 14
सपा 20 0 20