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भाजपा और कांग्रेस के बागी अड़े, 56 ने छोड़ा चुनाव मैदान

Fri, 27 Oct 2017 12:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में नामांकन वापसी के बाद अब विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। बगावत की चिंगारी थामने में दोनों प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल तंत्र फेल साबित हुआ है। भाजपा की चार प्रमुख सीटों पर बागियों के नामांकन वापस नहीं लेने से पार्टी प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं जबकि कांग्रेस में बगावत की तस्वीर पार्टी रणनीतिकारों के लिए डराने वाली है।
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कैबिनेट मंत्री कौल सिंह ठाकुर की सीट द्रंग समेत कांग्रेस में सात अन्य सीटें बागियों से प्रभावित हैं। भाजपा के लिए बड़ा झटका पालमपुर में प्रवीण, चंबा में सिटिंग विधायक वीके चौहान, फतेहपुर में बलदेव ठाकुर और श्री रेणुका जी सीट पर हृदय राम की बगावत है। नाम वापसी के अंतिम दिन तक 56 निर्दलियों ने नाम वापस लिया जबकि इससे पहले 82 नामांकन खारिज हो चुके हैं। अब 9 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए 338 प्रत्याशी चुनावी मैदान में बचे हैं।

शांता कुमार को झेलनी पड़ी किरकिरी

निर्दलीय चुनाव में उतरे भाजपा और कांग्रेस के अधिकांश बागियों ने दोनों दलों के नेताओं के आश्वासनों को अनसुना कर दिया। भाजपा के केंद्रीय महामंत्री संगठन रामलाल की अगुवाई में चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और प्रभारी मंगल पांडेय की तमाम कोशिशें विफल साबित हुईं।

आखिरी समय तक भाजपा ने पालमपुर से प्रवीण शर्मा और फतेहपुर से बलदेव ठाकुर और राजन सुशांत को मनाने में ताकत झोंके रखी। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी ने नए चेहरों को मौका दिया है। ऐसे में बागियों की मौजूदगी प्रत्याशियों की स्थिति को असहज बना रही है। शांता कुमार को भी इन दोनों बागियों के नहीं मनाने से किरकिरी झेलनी पड़ी।

चंबा में सिटिंग विधायक वीके चौहान पहले ही इनकार कर चुके थे जबकि श्री रेणुका जी से हृदय राम ने आखिरी समय में नामांकन वापसी से इनकार कर दिया। भरमौर और मनाली में बागी खड़े हैं, लेकिन उन्हें मनाने की र्कोई खास कोशिश नहीं की गई है। बड़े चेहरों में पार्टी केवल कसुम्पटी से पृथ्वी विक्रम सिंह को मनाने में कामयाब रही है।

नहीं माने वीरभद्र के करीबी

कांग्रेस में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों हरीश रावत और भूपेंद्र हुड्डा की बागियों को मनाने की कोशिश कुछ जगह कामयाब रही। जहां मुख्यमंत्री वीरभद्र के करीबी माने जाने वाले निर्दलीय उतरे थे, वहां डैमेज कंट्रोल पूरी तरह विफल रहा है। वीरभद्र के समझाने के बावजूद उनके करीबी मानने को तैयार नहीं हुए। पार्टी को आधा दर्जन सीटों पर बगावत का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

शिमला में वीरभद्र के करीबी हरीश जनारथा ने शिमला शहर में पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में बैठने से इनकार कर दिया है। नालागढ़ सीट पर हरदीप सिंह बावा आखिरी समय तक नहीं माने जबकि द्रंग में कैबिनेट मंत्री कौल सिंह के खिलाफ पार्टी पदाधिकारी पूर्ण चंद ठाकुर भी डटे हुए हैं। पार्टी के लिए रामपुर में सिंघी राम का नहीं बैठना भी झटका माना जा रहा है।

इन सभी बागियों से वीरभद्र की बातचीत भी करवाई गई, लेकिन उन्होंने मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया। कांग्रेस को भोरंज में प्रेम कौशल, बिलासपुर में तिलकराज शर्मा, नाचन से संजू डोगरा ने नामांकन वापस लिया है। इसके अलावा लाहौल, ऊना और कुल्लू में भी बगावत झेलनी पड़ रही है।

भाजपा के बागी
पालमपुर - प्रवीण शर्मा
फतेहपुर - बलदेव सिंह ठाकुर, राजन सुशांत 
चंबा - वीके चौहान, डीके सोनी
श्री रेणुका जी - हृदय राम
हरोली - रविंद्र मान
भरमौर - ललित ठाकुर

कांग्रेस के बागी
शिमला शहर - हरीश जनारथा
नालागढ़- हरदीप सिंह बावा
द्रंग - पूर्ण चंद ठाकुर
कुल्लू - रेणुका डोगरा
लाहौल - राजेंद्र करपा
ऊना - राजीव गौतम
रामपुर - सिंघी राम
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हिमाचल और गुजरात के एग्जिट पोल नतीजे 14 दिसंबर को

हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनावों में मतदान के बाद एग्जिट पोल के नतीजे 14 दिसंबर को आएंगे। चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दोनों राज्यों के एग्जिट पोल के नतीजों को जानने के लिए लोगों को 14 दिसंबर की शाम तक इंतजार करना होगा।

उन्होंने चुनाव आयोग के उस हालिया निर्देशों, आदेशों और चुनाव नियमों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि एग्जिट पोल के नतीजों का प्रसारण सभी राज्यों में सभी चरणों का मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद ही प्रसारित किया जा सकता है। गौरतलब है कि हिमाचल में एक चरण में 9 नवंबर को मतदान होगा।

जबकि गुजरात में दो चरणों यानी 9 और 14 दिसंबर को चुनाव होंगे। भले ही आने वाले दिनों में चुनाव आयोग ओपिनियन पोल को लेकर कोई नया निर्देश जारी करे। लेकिन मौजूदा नियम के मुताबिक वोटिंग से 48 घंटे पहले इस पर प्रतिबंध है।
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