हिमाचल प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव को लक्षित कर चुकी कांग्रेस का खास फोकस भाजपा के उन क्षेत्रों को चिह्नित कर प्रचार करने पर है, जिनमें लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अच्छे वोट लिए थे। इसके लिए कमजोर रहे जिला परिषद, पंचायत समिति वार्डों सहित ग्राम पंचायतों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इसका जिम्मा जहां पंचायती राज संस्थाओं के वर्तमान या पूर्व प्रतिनिधियों को दिया गया है तो वहीं पूर्व सदस्यों, प्रधानों, उपप्रधानों को भी इस रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।
हमीरपुर में उनकी 16,029 मतों के अंतर से जीत हुई थी। हालांकि, इस लीड को लेने में मोदी फैक्टर के अलावा यहां पर अनुराग ठाकुर का प्रभाव भाजपा से ज्यादा माना गया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सुजानपुर, कुटलैहड़ और गगरेट हैं, जहां से अनुराग को तो अच्छी लीड मिली, मगर उपचुनाव में कांग्रेस ने तीनों सीटें झटक ली थीं। इसी तरह नालागढ़ में भाजपा के सुरेश कश्यप को 15,164 मत ज्यादा मिले थे। इसके लिए कांग्रेस ने ऐसे सभी जिला परिषद, पंचायत समितियों के वार्डों के अलावा ऐसी तमाम पंचायतों पर फोकस किया है, जहां से भाजपा को लीड मिली। कई मंत्री, विधायक और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इन गढ़ों में उतर चुके हैं।
लोकसभा चुनाव के दौरान हुए छह सीटों के विधानसभा उपचुनाव से एक बात साफ हो चुकी है कि लोगों ने किस तरह से वोट डाला है। सुजानपुर, कुटलैहड़ और गगरेट विधानसभा हलके इसके गवाह हैं। इसी तरह ही वर्तमान विधानसभा उपचुनाव में भी कांग्रेस के पक्ष में ज्यादा मत पड़ेंगे। कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े पंचायत प्रतिनिधि अच्छा काम कर रहे हैं। - नरेश चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष