बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने कहा कि फ्रूट सेटिंग के समय प्रतिकूल मौसम, कम चिलिंग आवर्स, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण इस बार सेब का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने का अनुमान है।
मंडियों में सेब के भाव 130 से 145 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रहे हैं। 20 किलो की पेटी के आधार पर यह कीमत 2,600 से 2,900 रुपये प्रति पेटी बैठती है। अच्छे दाम मिलने के बावजूद, उत्पादन में भारी कमी से बागवानों की कुल आय प्रभावित होगी। कम उत्पादन से इस सीजन के बाद बागवानों के हाथ में खर्च करने के लिए कम रकम आएगी।
सेब की पेटी बगीचे से उपभोक्ता तक पहुंचने में कई आर्थिक गतिविधियां जुड़ी होती हैं। इनमें आढ़ती, लोडिंग-अनलोडिंग मजदूर, ट्रांसपोर्टर और अन्य सेवा प्रदाता शामिल हैं। 1.5 करोड़ पेटियों की कमी से इन सभी वर्गों में कारोबार प्रभावित होगा। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने कुल कारोबार और कमीशन के नुकसान की आशंका जताई है। पैकेजिंग सामग्री की मांग भी कम हो गई है, जिससे इस उद्योग को भी चुनौती मिल रही है।
हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था करीब 5,000 करोड़ रुपये की है। उत्पादन घटने से बागवानों की आय और नकदी घटेगी, जिससे क्रय क्षमता पर असर पड़ेगा। सेब की कम फसल का असर एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। बागवान की आय घटने से वह कम खर्च करता है, जिससे दुकानदार की बिक्री घटती है। दुकानदार कम खरीद करता है और परिवहन की मांग भी घटती है। यह क्रम स्थानीय अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह को कम करता है। बागवानों की क्रय शक्ति में कमी का मल्टीप्लायर असर होगा। खर्च योग्य आय घटने से पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। जीएसटी संग्रह में कमी से प्रदेश के राजस्व पर भी प्रभाव पड़ेगा। -प्रो. एनके शारदा, अर्थशास्त्री