पांच फरवरी को मांग एवं चर्चा के बाद अनुपूरक बजट पारित होगा। इसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश होगा और चर्चा की जाएगी। 6 फरवरी को शासकीय विधायी कार्य के अलावा अभिभाषण पर चर्चा रहेगी और 7 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पारित होगा।
8 को गैर सरकारी सदस्य दिवस होगा। नौ फरवरी को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बजट पेश करेंगे। इसके बाद अगले तीन दिन बजट अनुमान पर चर्चा के बाद 13 फरवरी को चर्चा समाप्त होगी।
14 फरवरी को गैर सरकारी सदस्य दिवस के बाद 15 व 16 फरवरी को वित्त वर्ष 2019-20 के अनुमान की मांगों पर चर्चा और मतदान होगा। 18 फरवरी को मांगों पर चर्चा एवं मतदान के बाद पारित होगा। इस दौरान कई विधेयक भी पेश कर पारित किए जाएंगे।
विधानसभा सचिव यश पॉल शर्मा ने बताया कि संसदीय चुनाव प्रस्तावित हैं इसलिए इस सत्र में सिर्फ 13 बैठकें ही आयोजित होंगी। अन्य बैठकों को अगले सत्र में शामिल किया जाएगा।
चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 का अनुमानित बजट 41,440 करोड़ रुपये का है, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2017-18 का बजट 35,783 करोड़ रुपये का था। आगामी बजट अनुमान 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा सत्र को छोटा करने पर कहा कि डरपोक सरकार पूर्ण सत्र न करवाकर चर्चा से भाग रही है। सत्र में 13 नहीं, कम से कम 22 बैठकें होनी चाहिए थीं।
सरकार के पास पर्याप्त समय है। जनवरी के अंतिम सप्ताह में सत्र को शुरू किया जा सकता था। सरकार कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय देकर मुद्दों पर चर्चा का साहस नहीं दिखा पा रही है।
इससे हिमाचल हित के मुद्दों को मंच नहीं मिल पाएगा। प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए। कर्जा लगातार बढ़ रहा है, इस पर क्या किया जाना है, सरकार चर्चा करना नहीं चाहती। चर्चाओं से सरकार का भागने का रास्ता ढूंढना अफसोस जनक है।